अलीगढ़। देश तथा प्रदेश में मुस्लिम युवाओं के हक-हकूक की आवाज बुलंद करने और सही राह दिखाने के इरादे से 39 वर्ष पहले अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी (एएमयू) के कुछ छात्रों ने स्टुडेंट इस्लामिक मूवमेंट ऑफ इंडिया (सिमी) नाम के जिस संगठन को खड़ा किया, वो एक दशक में ही रास्ता भटक गया था। अस्सी के दशक में ही तमाम कार्यकर्ता उग्रवाद की ओर बढ़ चुके थे।
इनकी राष्ट्रविरोधी काली करतूतें तब सामने आईं, जब अयोध्या में बाबरी ढांचे का विध्वंस हुआ। तब सिमी नेताओं ने तिरंगे तक को सलाम करने से भी इन्कार कर दिया था।
कई राज्यों में बम धमाकों में संलिप्तता की पुष्टि के बाद 2001 में सिमी पर प्रतिबंध लगा दिया गया। तभी से शहर के शमशाद मार्केट में खुला कार्यालय सील है। यहां के दुकानदार सिमी पर कोई बात नहीं करना चाहते। फिर भी, भोपाल जेल से सिमी के आतंकियों की फरारी और मुठभेड़ में मारे जाने के बाद यह संगठन फिर सुर्खियों में है।
वन-बुक, वन-प्रे
देश में आपातकाल (1975) के दौरान तमाम छात्र संगठनों पर भी पाबंदी लगी हुई थी। आपातकाल हटा तो छात्रों को लामबंद करने के इरादे से 25 अप्रैल 1977 को मुहम्मद अहमदउल्ला सिद्दीकी ने अलीगढ़ में सिमी की स्थापना की। शुरुआती सदस्यों में कुछ एएमयू छात्र थे, कुछ पूर्व छात्र। गोरखपुर, उत्तर प्रदेश के रहने वाले सिद्दीकी तब एएमयू से एमएससी (फिजिक्स) कर रहे थे। वही संस्थापक अध्यक्ष बने। दफ्तर खुला, एएमयू से सटे शमशाद मार्केट के एक कमरे में। सब सिमी सदस्य जमात-ए-इस्लामी से प्रभावित थे।
खुफिया इकाइयों से जुड़े सूत्र बताते हैं कि अस्सी के दशक में ही महाराष्ट्र, गुजरात और मध्य प्रदेश के कई सदस्य कश्मीरी उग्रवादियों के संपर्क में आ गए थे। ये बातें उजागर होनी शुरू हुईं, 1992 में बाबरी ढांचा विध्वंस के बाद। इसके बाद कट्टरवाद और बढ़ा। सिमी की उर्दू व अंग्र्रेजी भाषा में निकलने वाली पत्रिका में भी 'वन-बुक, वन-प्रेÓ (सिर्फ कुरान व अल्लाह को मानने) की बातें मुखर होकर कही जाने लगीं।
लगा प्रतिबंध
जमात-ए-इस्लामी को इसका आभास हुआ तो उसके सदस्य किनारा कर गए। नेक इरादे से जुड़े तमाम दूसरे लोग भी सिमी से अलग हो गए। महाराष्ट्र, गुजरात, उत्तर प्रदेश समेत कई राज्यों में बम धमाके हुए। आगरा में सिनेमाघर और बस में बम-ब्लास्ट में भी सिमी के हाथ की पुष्टि हुई। केंद्र सरकार ने वर्ष 2002 में आतंकी संगठन घोषित करते हुए सभी गतिविधियों पर पाबंदी लगा दी। अगस्त 2008 में सुप्रीम कोर्ट ने फिर प्रतिबंध लगा दिया। यह अभी बरकरार है। इंडियन मुजाहिदीन को अब सिमी का ही नया रूप माना जाता है। सिमी पर पाबंदी के बाद संस्थापक अध्यक्ष अहमदउल्ला सिद्दीकी अमेरिका चले गए। वह वहां प्रोफेसर हैं।
चुनाव भी लड़े
एएमयू के इतिहासकार प्रो. इरफान हबीब बताते हैं कि सिमी ने एएमयू में घुसपैठ की भरपूर कोशिश की थी, पर कामयाब न हो सके। सिमी से जुड़े छात्रों को एएमयू स्टुडेंट यूनियन के चुनाव में भी उतारा, पर जीत नहीं सके।
एएमयू में की थी कांफ्रेंस
सिमी ने 1999 में एएमयू के गुलिस्तान-ए-सैयद पार्क में राष्ट्रीय स्तर की सेमिनार की थी। कश्मीर के अलगाववादी नेता सैयद अली शाह गिलानी भी आए थे। तब, आइएएस अफसर महमूद उर रहमान एएमयू के कुलपति थे।
