भोपाल की सेन्ट्रल जेल भागे प्रतिबंधित संगठन स्टू
डेंट इस्लामिक मूवमेंट ऑफ इंडिया (सिमी) से जुड़े 8 संदिग्ध आतंकियों के एनकाउंटर पर कांग्रेस और आम आदमी पार्टी ने सवालिया निशाना लगाया है।
इस बीच सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जस्टिस मार्कंडेय काटजू ने भी एनकाउंटर को फेक बताते हुए दोषियों को फांसी की सजा देने की वकालत की है। जस्टिस काटजू ने फेसबुक और ट्विटर पर लिखा, 'जहां तक मुझे जानकारी प्राप्त हुई है, कथित एनकाउंटर फेक है।
जो भी इसके लिए जिम्मेदार हैं, ना केवल वो जिन्होंने इसे अंजाम दिया, बल्कि आदेश देने वाले वरिष्ठ अधिकारियों और नेताओं को भी मौत की सजा दी जानी चाहिए।' उन्होंने
प्रकाश कदम बनाम रामप्रसाद विश्वनाथ गुप्ता केस का हवाला भी दिया।
काटजू ने लिखा है कि दूसरे विश्व युद्ध के बाद नूरेमबर्ग ट्रायल्स के दौरान नाजी युद्ध अपराधियों ने यह दलील दी कि 'ऑर्डर तो ऑर्डर होता है', लेकिन उनकी याचिका खारिज कर दी गई थी और अधिकतर को फांसी की सजा हुई थी।
इसलिए जो पुलिसवाले यह सोचते हैं कि वे न्यायिक हत्या कर सकते हैं, उन्हें मालूम हो कि फंदा उनके इंतजार में है।
कांग्रेस-आप ने भी उठाया सवाल
भोपाल में एनकाउंटर के बाद आप और कांग्रेस, दोनों ने ही पूरे घटनाक्रम पर सवाल उठाए हैं। आप ने जहां सभी आतंकियों के एक साथ भागने और एक ही जगह मारे जाने पर सवाल उठाए हैं, वहीं कांग्रेस ने इस मामले में जुडिशल जांच की मांग की है।
आम आदमी पार्टी की विधायक अलका लांबा ने सोमवार को ट्वीट करके लिखा, 'आतंकी मारे गए,अच्छा हुआ। 8 आतंकियों का एक साथ भागना, फिर कुछ घंटों बाद एक ही साथ एनकाउंटर में मारे जाना। सरकार के पास "व्यापम" फार्मूला भी था।' आतंकियों के मारे जाने को लेकर कुछ सोशल मीडिया यूजर्स ने सवाल उठाए।
कांग्रेस महासचिव दिग्विजय सिंह ने पूरे घटनाक्रम को साजिश बताते हुए मामले में निष्पक्ष जांच की मांग की। उन्होंने शक जताया कि आतंकियों को किसी योजना के तहत जेल से भगाया गया। वहीं, कांग्रेस नेता कमलनाथ ने कहा, 'चूंकि अब सारे आतंकी मारे जा चुके हैं और हमें कोई जानकारी नहीं मिल सकती, इसलिए इस बात की जुडिशल जांच होनी चाजिए कि वे कैसे भागे।'
