खान
अशु
खेत, घर, पेड़, मैदान से लेकर कलेक्टर की जनसुनवाइ का
कक्ष तक... फान्सी का फन्दा, जहर, आग की लपटें, नदी, तालाब, कुएँ... जितनी मौत, उतने स्थान, उतने ही तरीके...! खबरों की रसद फिर
बढ़ती दिखाई दे रही है... सरकार, उसके
ऐलान और उसके वायदे-इरादे फिर कटघरे में है...! आधा-पोन जून गुजरते कई सियासी
उतार-चढ़ाव प्रदेश ने देखे... लेकिन खबरों के कारोबारियों का ध्यान सरकार की खताओ, गल्तियो, कमियों पर कम ही गया होगा...! वजह साफ थी, इधर कोई हरकत हुई-न हुई और उधर अखबार, टीवी चैनल, न्यूज पोर्टल से लेकर रेडियो मीडिया तक
के हिस्से में इश्तहारी बरकत! कारोबारी खबर बेचने वाले हर मौके को केश करते गए।
हालात यह हो गए अब हर मौका-बेमौका इश्तहारी रेवड़ी की दरकार बनी रहने लग गई, ठीक उसी तरह जैसे पिछले लोकसभा चुनाव
के दौरान करोड़ि इश्तहारों ने सरकार बनवाकर मीडिया को हमेशा की चट लगा दी, लेकिन जिस तरह अरमान पूरे न होने का
असर बड़ी सरकार के हर काम में कीड़े निकलने लगे हैं, वही हालात किसान एपिसोड में ढिलाइ के साथ इश्तहारों की खेप बन्द होने
से मप्र में बनने लगे हैं। लगातार मौत की खबरों को स्पेस मिलने लगा है और उम्मीद
की जा सकती है कि खबरों के सौदागरों के माध्यमों में इन मौतों के लिए जगह बनी
रहेगी, जब तक इश्तहार जारी होने का कोई नया
कारण नहीं बन जाता।
पुछल्ला
सरकार, सरकार के नाराज लोग और विपक्ष!
मुख्यमंत्री
शिवराज सिंह चौहान के निवास पर रोजा अफतार पार्टी। इसी दिन प्रदेश के इकलौते
मुस्लिम विधायक आरिफ़ अकील के यहाँ भी दावत-ए-अफतार। पिछले बरस शिव सरकार के कुछ
विधायक (पूर्व मंत्री) आरिफ़ भाई की दावत में मौजूद थे, सीएम हाउस के आयोजन को ठेन्गा दिखाकर।
अब कई नजरें इसी लिए टिकटिकी लगाए बैठी है कि पिछले साल के हालात दोहराने वाले तो
नहीं हैं।
