नाराजगी के वातावरण में जीएसटी के जश्न के मायने?



एसपी मित्तल
20 जून को केन्द्रीय वित्त मंत्री अरूण जेटली ने ऐलान किया है कि 30 जून की रात को जीएसटी लागू होने का जश्न मनाया जाएगा। इसके लिए संसद के दोनों सदनों का विशेष सत्र आधी रात को बुलाया है। इसी सत्र में रात 12 बजे राष्ट्रपति प्रणव मुखर्जी जीएसटी कानून को लांच करेंगे और 1 जुलाई से पूरे देश में जीएसटी लागू हो जाएगा।
चूंकि सरकार ने जीएसटी का ब्रांड एम्बेसेडर सुपर स्टार अमिताभ बच्चन को बनाया है, इसलिए जश्न तो शानदार होगा ही। जीएसटी के जश्न के क्या मायने हैं, यह अभी देश के आम लोगों के समझ में नही आ रहा है। देश में एक समान कर प्रणाली हो, यह अच्छी बात है। लेकिन फिलहाल तो देश भर में जीएसटी से नाराजगी ही नजर आ रही है। शायद ही कोई व्यवसायी होगा, जो जीएसटी के प्रावधानों से सन्तुष्ट हो।
सरकार ने मोबाइल सेवाओं तक पर टैक्स में वृद्वि कर दी है। सरकार का कहना है कि जीएसटी का फायदा आने वाले वर्षों में देखने को मिलेगा। सरकार माने या नहीं, लेकिन फिलहाल तो जीएसटी को लेकर देश भर में नाराजगी का माहौल है। अच्छा होता कि सरकार जश्न मनाने से पहले लोगों की नाराजगी को दूर करती। भाजपा की विचारधारा वाले व्यापारी भी सरकार के खिलाफ धरना प्रदर्शन कर रहे हैं।
इतना ही नहीं भाजपा संगठन में पदों पर बैठे नेता ही व्यापारियों के धरना प्रदर्शन की अगुवाई करने को मजबूर हैं। जब सरकार अपनी पार्टी के पदाधिकारियों को ही सन्तुष्ट नहीं कर पा रही है तो फिर किस बात का जश्न मनाया जा रहा है? भाजपा शासित राज्यों के मुख्यमंत्रियों ने भी जीएसटी में बढ़े टैक्सों को कम करने की मांग केन्द्र सरकार से की है। इसका ताजा उदाहरण राजस्थान की सीएम वसुंधरा राजे का है। देश का 97 प्रतिशत मार्बल पत्थर का उत्पादन और कारोबार राजस्थान में होता है।
अब तक मार्बल पर 2-3 प्रतिशत ही टैक्स लगता था। लेकिन जीएसटी लागू होने पर 28 प्रतिशत टैक्स की वसूली होगी। कमोबेश यही हालात अन्य प्रान्तों के भी हैं। जिन भाजपा सांसदों को लेकर संसद में जश्न की तैयारी हो रही है, वो सांसद भी टैक्स कम करने के लिए बार-बार वित्त मंत्री के पास जा रहे हैं।

अच्छा होता कि सरकार अपनी पार्टी के जनप्रतिनिधियों, पदाधिकारियें और जनता के मूड को ध्यान में रखते हुए जश्न मनाती। जहां तक आम जनता का सवाल है तो मंहगाई और अन्य कारणों से त्रस्त मानी जा रही है। यह माना कि नोटबंदी जैसे फैसलों से धनाढ्य वर्ग को लाईन पर लाया गया है। लेकिन ऐसे फैसलों का लाभ आम लोगों को भी मिलना चाहिए। 
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