बहराइच
: सामान्य तौर पर एक सिपाही तक के सामने आते ही आम आदमी की जुबान लड़खड़ाने लगती
है। और ऐसी हालत में अगर सामने खड़ा शख्स कोई कप्तान या डीएम हो तो आम आदमी की
घिग्घी तक बंध सकती है। लेकिन यह पत्रकार साहब हैं, इस मामले में बिलकुल अलग, अलहदा और लाजवाब हैं। चूंकि वह बड़े
पत्रकार कहलाते हैं, इसलिए उनकी बात ही अलग होती है। जिस भी अफसर को हौंक दें तो उसकी
छुच्छी निकल जाती है। यही वजह है कि डीएम-फीएम को वे जरूरत से ज्यादा भाव नहीं
देते हैं। अच्छे-अच्छे हैसियतदार लोग तक तो अपनी टेंट में खोंसे रखते हैं। और
आपको यह जानकर हैरत होगी कि इन सज्जन ने बहराइच के जिलाधिकारी आवास का एक हिस्सा
कब्जा करा रखा है। डीएम-आईएएस तक की हैसियत नहीं है कि वह अपने इस सरकारी बंगले
के इस मकान पर चूं भी कर सके।
अब
यह दीगर बात है कि ऐसी सारे बातें और दावे सिरे से ही हवाई होते हैं। लेकिन शर्मा
जी इस बारे में हवा खूब बांधे रखते हैं। मसलन, सूत्रों के अनुसार वे यूपी के उप मुख्यमंत्री
डॉ दिनेश शर्मा के रिश्ते में छोटे भाई हैं।
जी
हां, यह
अजय शर्मा जी हैं। बहराइच के स्वनामधन्य पत्रकार। नाम ही नहीं, काम भी अजय है। पूरे बहराइच और श्रावस्ती
तक में उनकी पत्रकारिता झम्मर-झम्मर चलती है। लिखना और कैमरे पर बोलना भले ही वे
जानते हों, लेकिन
गेटिंग-सेटिंग के क्षेत्र में वे धोनी-विराट तक को धूल चटा सकते हैं। लफ्फाजी करना
और लन्तरानियां फेंकना तो अजय शर्मा की खास अदा है। बल्कि सच तो यह है कि अगर यह
कला अजय शर्मा को नहीं आती, तो उनका यह तामा-झामा नहीं फैला होता। बात-वीर के तौर पर भी मशहूरी
हासिल कर चुके अजय शर्मा की एक पहचान बहुधंधी की है, लेकिन जरिया सिर्फ और सिर्फ पत्रकारिता
के पायदान ही हैं।
बहराइच
के डीएम बंगले में बने कर्मचारियों के लिए मकानों में से एक पर अजय शर्मा जी का
कब्जा है। शर्मा जी की हनक है। आपको बतायें कि पिछले साल चंदन के पेड़ों की चोरी
वाले मामले में पांच होमगार्डों को बुरी तरह लठियाने वाले अभय कुमार की फूंक
निकलती थी इन पत्रकार साहब के सामने। जानकार बताते हैं कि सरकारी मकान उनके पिता
के नाम पर एलाट था, जो डीएम के ड्राइवर थे। करीब दस साल पहले वे रिटायर तो हुए, लेकिन मकान खाली नहीं किया। जब बेटा ही
पत्रकार हो, तो
किसी डीएम की हैसियत कैसे पड़ सकती है कि वह मकान खाली कराये। खैर, बाद में पिता ने अजय के छोटे भाई को
अमीन का चपरासी बनवा दिया। यह दैनिक वेतन में लगा था, मगर अचानक कई लोगों को नौकरी दिलाने के
एक भण्डाफोड़ में फंस गया, नतीजा यह कि नौकरी से हाथ धो बैठा। मगर मकान बदस्तूर कब्जा में ही
रहा।
विश्वस्त
सूत्र बताते हैं कि एक बार तो बीएसएनएल के एक बड़े अफसर ने डीएम को शिकायती पत्र
दिया था कि अजय शर्मा और उनका भाई उगाही और ठेकेदारी में अब गुंडागर्दी करते हैं।
विश्वस्त सूत्र बताते हैं कि एक बार तो बीएसएनएल के एक बड़े अफसर ने डीएम को
शिकायती पत्र दिया था कि अजय शर्मा और उनका भाई उगाही और ठेकेदारी में अब
गुंडागर्दी करते हैं। विश्वस्त सूत्रों के अनुसार जिला दूरसंचार प्रबंधक ने डीएम
को एक सीडी भी सौंपी थी जिसमें अजय शर्मा द्वारा टीडीएम के दफ्तर में टीडीएम को दी
गयी धमकियों का टेप था। सूत्रों के अनुसार टीडीएम को अजय शर्मा ने धमकी दी थी कि
अगर उसे ठेका नहीं मिला, तो किसी लड़की को उसके दफ्तर में बुलाकर उसके कपड़े फड़वा कर दुराचार
के प्रयास का मुकदमा दर्ज करा दिया जाएगा।
डीएम
ने इस पर कड़ी कार्रवाई की, उनका चैनल भी छूट गया। मगर बाद में चैनल वालों को खुश करके अजय शर्मा
फिर काबिज हो गये। अजय शर्मा के बारे में भांति-भांति की चर्चाएं चलती हैं। प्रमुख
न्यूज पोर्टल मेरी बिटिया डॉट कॉम को बहराइच से भेजे गये एक पत्र को आप देखिये तो
आंखें फट जाएंगी। पत्र में लिखा है कि खुद
को फर्जी, कथित
व घुमन्तू पत्रकारों की चपेट से बहराइच भी अछूता नहीं है। पत्रकारों के चोले में
दिखने वाले ऐसे लोगों के कृत्यों से जिला व पुलिस प्रशासन तथा सूचना विभाग भी
परेशान रहता है। प्रदेश की सत्ता परिवर्तन के बाद से कई पत्रकारों और पत्रकारिता
की आड़ में सक्रिय कुछ कथित कलमकारों ने भगवा कवच का भी सहारा लेना शुरू कर दिया
है। ऐसे ही डी एम कालोनी में कब्जा कर कई वर्षोँ से रहकर धौंस जमाने वाले एक
पत्रकार हैं अजय शर्मा।
इन्होंने
अपने दो तीन भाईयों को भी चैनल की पत्रकारिता से जोड़ रखा है। जिनका काम खबरों की
आड़ में कैमरा चलाकर सब पर दबाव बनाना रहता है। यह शर्मा बन्धु कभी दो पहिया तो कभी
चार पहिया से रोजाना कलेक्ट्रेट, एस पी आफिस, विकास भवन और जिला अस्पताल का भ्रमण कर अपना समय बिताते हैं। इस
भ्रमण में जहाँ जो भी अधिकारी मिल गया और बास क्या हाल है ,कहकर इधर उधर की मारना शुरू किया। इन
जगहों कुछ समय इसलिए बिताते हैं कि उनके मातहत अधिकारी व कर्मचारी देख लें कि इनकी
बड़े साहब से बनती है। पिछले दिनों कुछ राजफाश हो जाने से बेचारे समाचार प्लस चैनल
से हटा भी दिए गए हैं। इस समय वह योगीराज में प्रदेश के उपमुख्यमंत्री डा०दिनेश शर्मा
को अपना रिश्तेदार बताकर धौसिया रहे हैं। चूंकि हमाम में सारे विभाग नंगे हैं
इसलिए डरते हैं। बताते हैं कि जिला अस्पताल में कुछ ठेका पट्टी का काम उन्हें मिल
भी गया है। अब देखना यह है कि यह अपनी जुगत कहां कहां भिडाने में सफल होते
हैं।गोरी चमड़े वाले यह शर्मा बन्धु हर क्षेत्र में चर्चित हैं।
ने
इस पत्र के बारे में अजय शर्मा जी से उनका पक्ष जानना चाहा, तो वे ओशो-रजनीश की तरह प्रवचन देने
लगे। उनकी बात सुनिये:- महोदय कुमार सौरवीर जी फर्जी पत्रकार की परिभाषा हमें नही
पता डिजिटल युग मे आम आदमी भी अपनी कलम का खुद का संपादन और सम्प्रेषण का अधिकारी
हैं,डिजिटल
मीडिया/सोशल मीडिया भी देश के प्रधानमंत्री का सबसे बड़ा विजन और सपना हैं जिसका
उदाहरण देश के प्रधानमंत्री ने योग दिवस के अवसर पर ऐलानिया तौर पर इस बात को
उदघोष किया है कि युवा शक्ति और तकनीकी से ही देश की तरक़्क़ी सम्भव है, जिस मिशन को शायद मेरी बिटिया डॉट कॉम
से लेकर तमाम लोग अपने अपने तरीक़े से अपनी आवाज आम आदमी तक पहुँचा रहें हैं, रही बात पत्रकारिता की तो मैं पिछले 15
वर्षों से विभिन्न मीडिया संस्थानों के साथ कार्य कर लगातार पत्रकारिता का फर्ज आप
की ही तरह निभाता चला आ रहा हूँ, मैं पिछले 5 सालो तक लगातर
समाचार प्लस जैसे सम्मानित न्यूज़ चैनल का बहराइच ज़िले का संवाददाता रहा हूँ
और मैं उस न्यूज़ चैनल का बड़ा शुक्र गुजार हूँ जिसने हमें अपने प्लेटफार्म पर
निखारने का पूरा अवसर दिया, लेक़िन किसी संस्थान के अंदर काम करने का यह मतलब नही की उस संस्थान
में ही काम करने का मेरा ही बैनामा करा लिया गया हो कम्पनी अपनी शर्तो के हिसाब से
कार्य करती और कराती है जैसा कि आप जैसे सीनियर संपादक भी जानते होंगे और सर्व
विदित है, हर
व्यक्ति या संवाददता अपनी बेहतरी के लिये नित नये नये मुक़ाम के लिये कार्य करता है, रही बात हमारे भाईयो के पत्रकारिता में
काम करने की तो सभी का अपना मानवाधिकार हैं यूपी के तमाम जिलो में बाप बेटे, पति पत्नी भाई नही पूरा खानदान तक
मीडिया संस्थान है किसी को कार्य करने से कोई रोक नही सकता किसी भी संविधान में यह
मनाही नही की किसी का भाई पत्रकार नही हो सकता, रही बात पत्रकारिता के लिये किसी भी
कवच की तो हमारे संस्कार ही हमारा कवच है,जिस सम्मानित वरिष्ठ नेता का
रिस्तेदारों का हवाला दिया जा रहा है उस का मुझसे न तो परिचय है और न ही मैं उनको
पहचानता हूँ किसी की तरफ़ से यह फर्जी आरोप हैं, कालोनी में रहने का जहा सवाल हैं मेरे
भाई कर्मचारी है पहले मेरे पिता कर्मी थे तो क्या पिता के साथ बेटे नही रहते उनकी
मौत होने के बाद क्या बेटे कही भाग जाये, रही बात पत्रकारिता की तो भाई क्या
पत्रकारिता में कैमरा चलाना भी अपराध है, रही बात गाड़ी से चलने की तो भाई जी
हमारी तो गाड़ी बहुत छोटी पहिया की गाड़ी है लोग तो लैंड क्रूजर और आडी से लखनऊ में
भी दिख जायेंगे,अब
भाई साइकिल से चलेंगे तो लोग और कुछ कहेंगे न जाने किस पार्टी से जोड़ देंगे, अब पत्रकार हूँ तो भाई अधिकारियों के
दफ़्तर नही जाऊँगा तो कहा जाऊंगा क्यो की पत्रकारिता के लिये फिर जाया कहा जाता है, रही बात काम धाम की तो भाई पत्रकारिता
से पेट की आग नही बुझती उसके लिये कुछ काम भी जरूरी है और बाकायदा उसके लिये सरकार
की तरफ़ से कर्ज लेकर स्वरोजगार को बढ़ावा देने की भी व्यवस्था है,हमारी गोरी चमड़ी तो ईश्वर की नियामत है
इसके लिये कसम गंगा मैया की ऊपर वाले ने एक रत्ती की रिश्वत नही ली,मेरी गोरी चमड़ी पर तंज कसने वाले पहले
यह सोचे उनकी चमड़ी क्यो काली.......मेरे
फिक्रदान करीबी साथियो के लिये बस यही
कहना है... तेरी मुख़ालफ़त से ही मेरी शख्सियत सॅवरती हैं, मैं अपने दुश्मनों का बड़ा एहतराम करता
हूँ.......नमस्कार......अजय शर्मा
अब
जरूरत इस बात की है कि हम पत्रकारिता में धंस चुके दलाल, घटिया, ब्लैकमेलर और ठेकेदारों को सरेआम नंगा
करें। सिर्फ देखिये ही नहीं, कि वे कितने नंगे, छिछोरे, लुटेरे हैं। बल्कि उन्हें बेपर्दा करने का अभियान भी छेड़ने में मदद
कीजिए। पिछले कुछ महीनों में हमने ऐसे कई पत्रकारों को सरेआम नंगा किया है, आप भी अपनी सहभागिता निभाइये।
पत्रकारिता के ऐसे काले कलंकों को बेपर्दा कीजिए। हमें लिख भेजिए ऐसे कुल-कलंकित
पत्रकारों की असलियत। खोजिए, पता कीजिए कि वे क्या-क्या करते हैं, कैसे करते हैं और असलियत में उनकी
हैसियत क्या है। सच तो यही है कि पहले तो हम इस तरह की खबरें छिटपुट ही छाप पाते
थे, लेकिन
अब उसे एक नियमित स्तम्भ की तरह पेश करना चाहते हैं। उम्मीद है कि आप जैसे सजग
पाठक इस बारे में हमारी मदद करेंगे। साभार मेरी बिटिया डॉट काम
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