जम्मू
काश्मीर में आतंक वादियों के इशारे पर अलगाववादियों द्वारा इधर सुरक्षा बलों के
साथ जिस तरह का व्यवहार किया जा रहा है उसे देखकर इंसानियत को शर्म आ जाती है। दस
बीस पचास सौ अलगाववादी पूरी भीड़ को उकसाकर आतंकवादियों के मिशन को गति देते रहते
है।जम्मू काश्मीर में अलगाववादी या आतंकी पूरा समाज नहीं है बल्कि उनके बीच बैठे
कुछ लोग हैं।यहीं लोग जम्मू काश्मीर को हमेशा रक्त रंजित कर बगावत करवाते रहते
हैं।
यहीं
घाटी के युवकों लालच देकर आतंकी बना कर सीमा पार करवा रहे हैं तथा घाटी में आतंकी
हमले व सुरक्षा बलों की हत्या करवा रहे हैं।यहीं लोग आतंकी संगठनों और दुशमनों से
मोटी रकम लेकर जम्मू काश्मीर में प्रायोजित विरोध व हमले करवा रहे हैं।इन लोगों ने
जम्मू काश्मीर को अंशाति बनाये रखने का ठेका ले रखा है।दुख इस बात का है कि वहाँ
की सरकार इन अलगाववादी आतंकवादियों की हर राष्ट्र विरोधी हरकतों को नजरअंदाज करके
इन्हें भूला भटका बताकर इनका मनोबल बढ़ा रही है।
वह
लगातार हमारे सुरक्षा बलों और बेगुनाहों को निशाना बना रहे हैं और हम महात्मा
गाँधी का अहिंसा का पाठ पढ़ कर सपोले को दूध पिलाकर उसका हौसला अफजाई कर रहे
हैं।हमारे सुरक्षा बलों के हाथ और हथियार बाँध दिये गये हैं और उन्हें संयम बरतने
के नाम पर अलगाववादियों आतंकवादियों की मार खाने पर मजबूर किया जा रहा है।आखिर इन
राष्ट्रविरोधी ताकतों को कब तक संरक्षण देकर बढ़ावा दिया जाता रहेगा।माहे रमजान
में जबकि पूरी दुनिया के मुसलमान पवित्र रमजान की 27वीं शब-ए-कद्र की रात अपने
गुनाहों के लिये ईश्वर से माफी माँग रहे थे उसी समय श्रीनगर की वादियों में कुछ
तथाकथित अपने को मुसलमान होने का दावा करने वाले दिल दहला देने वाला गुनाह कर रहे
थे।
मस्जिद
के अंदर इन्सानित की शिक्षा दी जा रही थी तो बाहर हैवानियत का नंगा नाच हो रहा
था।एक नवजवान पुलिस अधिकारी को घेरकर उसकी इस कदर बेरहमी से पिटाई की गयी कि उसकी
मौत हो गयी।अधिकारी का दोष यह था कि वह मस्जिद के बाहर सादी वर्दी में खड़ा मस्जिद
के अंदर आने जाने वालों पर निगाह रखने के लिये फोटो खींच रहा था।फोटो खींचना कोई
इतना बड़ा अपराध नहीं होता है जिसके लिये उसे बर्बरतापूर्वक दौड़ा दौडाकर मारा जाय
और निर्वस्त्र करके निर्मम हत्या कर दी जाय।
सुरक्षा
बलों पर हमला करने वाले भूल रहे हैं कि इन्हीं सुरक्षा बलों को देखकर एक समय ऐसा
भी था जब उन्हें भागने की जगह नहीं मिलती थी।लगातार सुरक्षा बलों पर हो रहे हमलों
को नजरअंदाज करने का परिणाम है कि डीएसपी मोहम्मद अयूब पंडित की नृशंस हत्या कर दी
गयी।सुरक्षा बलों को हमला करने वालों को भरपूर जबाब देने की छूट दी जानी चाहिए और
हमलावरों को भूला भटका नहीं बल्कि राष्ट्रद्रोही मानकर उनकी तरफ बंदूक की नाल सीधी
करने की जरूरत है।एक व्यक्ति को जीप के आगे बाँधकर सुरक्षा बलों की जान बचाने पर
हंगामा करने और उसे अमानवीय बताकर कार्यवाही की माँग करने वाले कहाँ चलें गये।
मुठभेड़
में मारे गये आतंकवादियों के जनाजे में शामिल होकर विरोध करने वाले राष्ट्रभक्त
नहीं बल्कि देश के दुश्मन के बराबर है और इनके साथ रियायत करने का मतलब आस्तीन में
साँप पालकर उसे दूध पिलाने जैसा है।अलगाववादी काश्मीरी ही आतंकवादी है और उन्हीं
के घर परिवार वाले वहाँ पर मुहिम चलाकर फूलों के महक वाली घाटी को दुर्गंधयुक्त
बना रहे हैं तथा इबादतगाहों को आतंकियों की शरणस्थली बना रहे हैं।
अब
समय आ गया है कि यह सुनिश्चित कर दिया जाय कि जम्मू काश्मीर में वहीं रह सकता है
जिसे तिरंगे से नफरत न हो और अपने को भारतीय मानता हो।जिसे आतंकी संगठन और दुश्मन
देश पसंद हो उसे जम्मू काश्मीर की सरजमी पर रहने का कोई अधिकार नहीं मिलना
चाहिए।राजनैतिक इच्छाशक्ति के अभाव में आज जम्मू काश्मीर समस्या कैंसर का रूप धारण
करके अन्तरराष्ट्रीय स्तर पर पहुँच गयी है।अगर तत्काल इसका आपरेशन नहीं किया गया
तो कैंसर पूरे शरीर में फैल सकता है।
भोलानाथ मिश्र
वरिष्ठ पत्रकार/समाजसेवी
रामसनेहीघाट,बाराबंकी यूपी।
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