देश से भ्रष्टाचार को समाप्त करके आमजनता को राहत देने के लिये प्रधानमंत्री द्वारा चलाई जा रही मुहिम भ्रष्टाचारियों से ज्यादा आमजनता के लिये मुसीबत बनती जा रही है।
भ्रष्टाचार के खात्मे के लिये प्रधानमंत्री द्वारा लागू की गयी नोटबंदी योजना का सबसे ज्यादा समर्थन आमजनता ने किया और विरोधियों को चारों खाने चित्त कर दिया। आमजनता ने जिन भ्रष्ट हरामखोरों के लिये तमाम मुसीबत उठाने के बावजूद प्रधानमंत्री का साथ दिया उन भ्रष्ट हरामखोरों को कहीं बैंक में लाइन लगाये या सिर पीटते भले ही किसी ने नहीं देखा हो लेकिन आमजनों को बैंक में लाइन लगाते लगाते पसीना जरूर निकल आया।
लोग अपना सारा कामकाज छोड़कर रोजाना बैंक खुलने के पहले लाइन में लग जाते थे और शाम को भूखे प्यासे मुरझाया चेहरा लेकर हाथ मलते लौट जाते थे। इसके बावजूद आमजनता प्रधानमंत्री के साथ खड़ी रही और चुनाव में खुलकर साथ देकर विरोधियों की बोलती बंद कर दी गयी। नोटबंदी का खामियाजा मोदी समर्थक आमजनों को भुगतना पड़ा और जिन हरामखोरों के लिये योजना लागू की गयी थी उनका बाल बांका नहीं हुआ और न कोई राजा से रंक ही बन सका। नोटबंदी के समय भी हरामखोर हरामखोरी करते रहे और सीधे बैंक से नोट बदलते और खर्च करते रहे।
नोटबंदी के बाद से आधार कार्ड को हर व्यक्ति के भविष्य से जोड़ने की मुहिम शुरू कर दी गयी और सुप्रीम कोर्ट के हस्तक्षेप के बावजूद हर कार्य के लिये आधार कार्ड अनिवार्य कर दिया गया। आमजनता आधार कार्ड बनवाने के लिये दौड़ती व भटकती घूम रही है और आज भी पागलों की तरह आधार कार्ड बनवाने में जुटी है। बैंकों में हर खातेदार के लिये आधार कार्ड लगाना अनिवार्य कर दिया गया है और स्पष्ट घोषणा कर दी गयी है कि जो आधार नहीं लगायेगा उसे बैंक से भुगतान नहीं दिया जायेगा।यह सही है कि भ्रष्टाचार पर रोक लगाने के लिये आधार कार्ड की महत्वपूर्ण भूमिका है लेकिन जिन बैंक खातेदारो का लेनदेन साल में लाख दो लाख के अंदर होता है वह कौन सी चोरी कर लेंगे।
लाख दो लाख जमा करने वाले आमजन हैं तथा इनकी संख्या इस समय सबसे ज्यादा है क्योंकि वर्तमान समय में सरकार की सारी योजनाओं का लाभ बैंक के माध्यम से ही मिलने लगा है। रेलवे यात्रा हो चाहे या राशन कार्ड हो हर जगह आधार की जरूरत पड़ने लगी है। भ्रष्टाचार रोकने के नाम पर गैंस का अनुदान मौके पर खरीदने के समय न देकर बैंक के माध्यम से करके आधार से लिंक कर दिया गया है। पहले लोगों को गैस खरीदने के लिये कम पैसों की व्यवस्था करनी पड़ती थी आज उसे अधिक करनी पड़ती है।
बैकों की मनमानी के चलते लोगों को समय पर अनुदान का लाभ नहीं मिल पा रहा है और आये दिन बैकों में आधार लिंक कराने के लेकर विवाद व लोगो के साथ अभद्रता होने लगी है। मोदी के नाम पर जान छिड़कने वाले आमजन को डिजिटल इन्डिया और भ्रष्टाचार मिटाने के नाम पर परेशान होना पड़ रहा है। इस देश से भ्रष्टाचार मिटाना और आधुनिकता के दौर में ले जाकर डिजिटल इन्डिया बनाना कोई खराब बात नहीं है लेकिन भ्रष्टाचार मिटाने के नाम पर आमजन को परेशान करना उचित नहीं है। अतिक्रमण हटाने के नाम पर गुमटी ठेलिया लगाने वालों की रोजी रोटी छीन ली जाय यह भी उचित नहीं है।
भोलानाथ मिश्र
वरिष्ठ पत्रकार/समाजसेवी
रामसनेहीघाट,बाराबंकी यूपी।
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