खान अशु
ईमानदारी की पीपड़ी बजाने वालों पर जब करोड़ों रुपए की हेरफेर साबित होती है तो ऐसा ही होता है, जो आजकल दिल्ली में चल रहा है। बेईमानी नहीं की, के बदले बहनोई के परलोक सिधार जाने के सिम्पेथी वान्छित बयान बाहर आते हैं।
भ्रष्टाचार पर चर्चा करने के लिए सजी विधानसभा में EVM का भूत निकल आता है। तकनीकी नेताओं ने अपनी तकनीक का उपयोग तब किया है, जब चिड़ियाँ खेत चुग गई। दिल्ली निकाय चुनावों की करारी हार, उससे पहले विधानसभा चुनाव में नाक के बल गिरने का सदमा, एक-एक कर कम होते साथी और रोते हुए अन्ना का यह कहना कि केजरीवाल से यह उम्मीद कतई नहीं थी....
चन्द बरस की नन्हे कदम चली पार्टी का जोश यह कि राजनीति के सूरमाओ को चुनौती देते फिरे, अन्जाम तो यह होना ही था। अब अपनों में बदनाम, चाहतमन्दो से लगातार बढ़ती दूरी, जहाँ से चले थे उससे भी दस कदम पीछे आ खड़े हुए 'आप' को खुद पर रहम खाने की जरुरत है। EVM गडबड़ की उसकी सच्ची कहानी को भी अब कोरा झूठ करार दिया जाना भाजपा के लिए आसान हो गया है।
चीख-चीखकर केजरीवाल का यह दावा करना कि सारी मशनरी, सारी एजेंसियां, सारा अमला, सारे रसूख, सारे कानून और सभी फैसलों पर भाजपा का एकाधिकार है, तो क्यों नहीं वह उन्हें सलाखों के पीछे पहुंचा देती, जवाब यह है कि भाजपा इतनी नासमझ नहीं कि किसी छोटे बच्चे को लप्पड मारकर उसे सारे जमाने की हमदर्दी बटोरने के लिए आजाद कर दे। EVM में गडबड एक अलग मुद्दा है, भ्रष्टाचार एक अलग मामला, समझदार नेताओं ने अनपढ़, जाहिल लेकिन घाघ नेताओं से पन्गा लेकर खुद के ही पैर पर कुल्हाड़ी चला ली है।
पुछल्ला
सबका साथ, सबका(?) विकास!
नारा देना आसान, उसे भूल जाना और भी सरल। नमामि गंगे से लेकर नर्मदा शुद्धिकरण और धार्मिक समागम सिंहस्थ पर अरबों रुपए खर्च करने वाली सरकार ने बचत और कटौती के नाम पर कास्ट कटिन्ग की कैन्ची चलाई है हज सब्सिडी पर।
380 से सीधे 200 करोड़ की गई सब्सिडी का असर गरीब अकीदतमन्दो पर पड़ने वाला है, जिन्हें एयरफेयर के लिए 30 हजार रुपये ज्यादा अदा करने पड़ेगे। सब्सिडी का 'रहम' सरकार पूरी तरह हटाकर अगर हज के लिए एयर लाइन्स की ग्लोबल टेन्डरिन्ग की मेहरबानी ही कर दे तो हाजियो को वह रकम अदा न करना पड़े, जो एयर इंडिया की खटारा फ्लाइट में सफर की सरकारी जिद में करना पड़ रही है।
