अतिक्रमण बना जी का जंजाल, आला अफसरों के आदेश का भी नही हो रहा पालन


गणेश मौर्य
जहाँगीरगंज(अम्बेडकरनगर)। रास्ते को लेकर दो पक्षों में चल रहे विवाद में एक पक्ष की अपील पर दोबारा उच्च न्यायालय ने लोक निर्माण विभाग व एसडीएम को सरकारी भूमि पर स्थित अतिक्रमण को हटाए जाने का आदेश दिया।हालाँकि उक्त आदेश का अनुपालन अभी तक नहीं हो पाया है।
         गौरतलब है कि जहाँगीरगंज थाना क्षेत्र के कम्हरियाँ मार्ग पर स्थित सुजावलपुर गांव में रामबूझ का विपक्षी से रास्ते को लेकर लम्बे अरसे से विवाद चल रहा है रामबूझ का आरोप है कि विपक्षी उसके घर के सामने लोक निर्माण विभाग की भूमि पर पक्के व अस्थाई निर्माण के जरिए अतिक्रमण कर रखा है।
जिससे आए दिन उसके घर का रास्ता भी अवरुद्ध कर दिया जाता है इसी प्रकरण में रामबूझ ने हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच के समक्ष अपील कर सरकारी भूमि से अतिक्रमण हटाए जाने की मांग की थी जिसके परिप्रेक्ष में कोर्ट ने तत्कालीन एसडीएम व लोक निर्माण विभाग को अतिक्रमण हटाने का पूर्व में आदेश दिया था इस के क्रम में तत्कालीन एसडीएम विनय कुमार गुप्ता व तहसीलदार राजकुमार ने पुलिस बल के साथ गत दो अप्रैल को कोर्ट के आदेश का अनुपालन में अतिक्रमण हटवाया था हालाॅकि प्रशासनिक टीम द्वारा महज छप्पर हटवा कर कोर्ट के आदेश की औपचारिकता पूरी की गयी थी।
अन्य पक्के अतिक्रमण न हटवाए जाने पर रामबूझ ने पुनः कोर्ट की शरण ली इसी बीच तत्कालीन एसडीएम विनय कुमार गुप्ता का स्थानांतरण हो गया नए एसडीएम पंकज श्रीवास्तव ने कार्यभार ग्रहण किया कोर्ट ने इसका संज्ञान लेते हुए पुनः गत 26 अप्रैल को एसडीएम व लोक निर्माण विभाग के अधिशासी अभियंता को पुनः लोक निर्माण विभाग की भूमि से पक्के निर्माण सहित सभी अतिक्रमण मौके से हटाए जाने का आदेश जारी किया गया जिसमें सप्ताह में आदेश का अनुपालन सुनिश्चित करने को कहा गया हालांकि अभी तक कोर्ट के आदेश का अनुपालन प्रशासन नहीं करा सका।
एसडीएम पंकज श्रीवास्तव ने बताया कोर्ट का आदेश मिला है 17 मई तक आदेश का अनुपालन होना है तब तक यह अनुपालन कर दिया जाएगा बता दें कि यह प्रकरण सियासी दखलअंदाजी के चलते निस्तारित नहीं हो पा रहा है मजेदार बात यह है कि वर्तमान सत्ताधारी दल के अलग-अलग गुट  ही दोनों तरफ से पैरवी कर मामले मामले को और पेंचीदा बना रहे हैं इसी के चलते प्रशासन भी माकूल कार्रवाई से बचता नजर आ रहा है इसी के चलते दोनों पक्षों में कई बार संघर्ष भी हो चुके हैं लेकिन प्रशासन इससे सबक लेता नजर नहीं आ रहा है।अनुमान है कि शायद उसे बड़े संघर्ष का इंतजार है।
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