अजीत कुमार सिंह
कहीं खाकी का कहर, तो कही खद्दर का।बर्ष 2007में बहुजन समाज पार्टी की स्पस्ट बहुमत मे सरकार बनाने के बाद जनता ने सोचा था। कि कुछ विकास कार्य होंगे और गरीबों की व्यथा सुनी जाएगी।लेकिन उस सरकार में कई सरकारी अफसर तक नेताओं के कहर के शशिकार हो जान से हाथ धो बैठे थे। और भ्रष्टाचार चरम पर पहुंच गया था।सरकार के मंत्री और विधायकों तथा सांसदों ने जमकर लूट खसोट की थी।और अपनी जेब भरी थी।
इसी से त्रस्त होकर उत्तर प्रदेश की जनता जनार्दन ने वर्ष 2012 के विधानसभा चुनाव में समाजवादी पार्टी को सरकार बनाने को स्पष्ट बहुमत दिलाया था। और उम्मीद की थी कि यह सरकार हमारी आशाओं और उम्मीदों पर खरी उतरेगी। मगर उस सरकार में भी गरीब जनता जनार्दन की कोई सुनवाई नहीं हुई। उसमें भी भ्रष्टाचार एवं दबंगई चरम सीमा पर पहुंच गई थी।उस सरकार में तो सत्ता दल के विधायक तहसील दिवस तथा थाना दिवसों में जमकर बैठ जाते थे।
जिसकी बजह से गरीब जनता जनार्दन ने इन दिवसों में शिकायत लेकर जाना ही छोड दिया था।थाने और तहसील विधायकों एवं छुटभैया नेताओं के अड्डे बन गये थे।सरकारी मुलाजिमों ने जनता जनार्दन की बात को सुनकर समाधान करना ही उचित नहीं समझा था।और अपने कर्त्तव्य तथा का निर्वाह करना ही भूल गए थे।इसी गुस्सा के फलस्वरूप इसी जनता जनार्दन ने 2017 के विधान सभा सामान्य निर्वाचन मे तीसरे स्थान पर पहुंच चुकी भारतीय जनता पार्टी को स्पष्ट बहुमत से भी ज्यादा सीटें देकर एक उम्मीद की थी कि इस जंगल राज से छुटकारा मिल जाएगा।और प्रदेश के गुंडे प्रदेश छोड कर चले जायेंगे। और कानून व्यवस्था अच्छी हो जायेगी।
लूट खसोट चोरी डकैतों का सफाया हो जायेगा।और अधिकारियों को कानून व्यवस्था को दुरुस्त करने में किसी भी तरह का राजनीतिक हस्तक्षेप से मुक्ति मिल जायेगी।और अधिकारी वर्ग खुलकर काम कर सकेगा।मगर ये अंदाजा तो मतगणना के बाद ही हो गया था।कि ये पार्टी भी कानून व्यवस्था नही बना पायेगी।क्योंकि कुछ विधायकों ने निर्वाचित होने के बाद ही किसी ने पुलिस अधिकारियों को धमकाना एव गरियाना शुरू कर दिया था।उसके बाद भी उत्तर प्रदेश की जनता को लगा किसी चलो कोई बात नहीं अभी सरकार नही बनी है।
विधायक बेलगाम हैं।सरकार बनने के बाद सब सही हो जायेगा।मगर हालत जस के तस हैं ।हद तो तब हो गई,जब ट्रेनीज आईपीएस चारू निगम को गोरखपुर के विधायक राधा मोहन दास अग्रवाल ने जाम लगाने के आईपीएस अधिकारी को भरी भीड में कैसा व्यवहार किया इसका मैं उल्लेख नही कर सकता।जबकि प्रदेश के मुख्य मंत्री आदरणीय योगी आदित्यनाथ जी महिला शक्ति का आदर और सम्मान करते हें।यदि इन्हीं की तरह सभी नेता हो जाये तो आसली महिला ससक्तीकरण धरातल पर उतारता दिखाई देगा।
उस विधायक को ये सोचना चाहिए कि मे जिस व्यवहार को इस वहिन या वेटी तुल्य इस इस आईपीएस अधिकारी के साथ करते रहा हूँ।मेरे इस व्यवहार से इसके दिल और दिमाग पर क्या असर पडेगा।जो कानून व्यवस्था बनाना सीख रही है।मेरी सरकार के मुखिया से बिनम्र अनुरोध है कि विधानसभा के इन माननीय सदस्य पर तत्काल कार्रवाई करने का कष्ट करें।जिससे सरकार की अपेक्षा जो आपकी सरकार से हे वो पूरी हो सकें।इन्हीं अपेक्षाओं और उम्मीदों के साथ
