'शिव' ! अब तो त्रिनेत्र खोलो, वर्ना ये धर्म रक्षक आपके विनाश का कारण बनेंगे?


खान अशु
कोई गांव-खेड़ा या टप्पा नहीं, प्रदेश की राजधानी... वहशत का ऐसा नन्गा नाच कि कुछ सिरफिरे सरेआम किसी को गाड़ी से बाधते हैं, उसे घिसटते हैं, सर पत्थरों पर दे मारते हैं और तब जी नहीं भरता तो उसे गाड़ी के नीचे कुचल डालते हैं....
शाबाशी उन रक्षकों को, जो खुद को सनातन धर्म की रक्षा करने का दावा करते हैं। बहुत बहादुरी का काम अन्जाम दिया उन्होंने, एक गरीब, लाचार, मजदूरीपेशा इन्सान पर अपने बाहुल्य का सिक्का न जमाते तो फिर किस पर आजमाते!
तेरह साल के शासनकाल में विचरण कर रही शिवराज सरकार के लिए इसे काला धब्बा कहा जा सकता है। लचर होती कानून व्यवस्था और बेखौफ होते अपराधी और बाहुबल के साथ भाजपा मिशन-18 में यही आदर्श स्थितियाँ लेकर जनता के बीच जाने की रणनीति पर काम कर रही है शायद। मुहल्ले, गलियों, बस्तियों और झुग्गियों में तथाकथित धर्म ठेकेदारों ने भाजपा शासन को अपना स्वर्णिम काल मान लिया है।
हर ऐरा गेरा, नत्थु खेरा खुद को धर्म का हितैषी और रक्षक निरूपित करने में लगा है। साथ ही इसे साबित करने का आसान तरीका उसे दूसरे मजहब के लोगों पर जुल्म ढाना लगता है, इसी से उसकी योग्यता तय होती है और इसी से उसे सच्चा धर्म रक्षक होने का खिताब मिलता है।
शिव अब भी अगर ध्रतराष्ट्र बने बैठे रहे और अपने अधिकारों और ताकतों का त्रिनेत्र नहीं खोला तो चन्द कदम पर खड़े चुनावी महाभारत में यह पिशाच सेना तुम्हारे विनाश का कारण बन सकती है। वक्त है, वक्त से पहले सख्त हो जाओ, वर्ना यही धर्म रक्षक तुम्हारे लिए भक्षक भी बनेंगे और विनाश का कारण भी।

पुछल्ला
कही खुशी, कही गम!
सीधे सरल और सबमें घुलमिल जाने वाले मम्मा सुरेन्द्रनाथ सिंह के हाथों राजधानी भाजपा की कमान खुशियों का संचार करने जैसा निर्णय, सबने शिरोधार्य भी किया, कोई हलचल, कोई विरोध नहीं।
दूसरी तरफ इसी पार्टी के अल्पसंख्यक मोर्चा की प्रदेश कार्यकारिणी पर बवाल छाने लगा है। एक इन्दोरी मुस्लिम भाजपाई का इस टीम में शामिल होना, चन्द दिनों पहले अखबारों की सुर्खियों में रहा उसका और रिश्तेदारों का शराब कारोबार से जुड़ा होना मिलान किया जाने लगा है। आला नेताओं से शिकायत से लेकर पत्रकारवार्ता के जरिए पोल खोलो अभियान की तैयारी में कुछ लोग जुट गए हैं।
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