सुधीर चौधरी और रवीश कुमार में कोई फर्क नही, एक कालेधन पर मौन, दूसरा काली कमाई से लेता है वेतन


1- सुधीर चौधरी और रविश कुमार में कोई फर्क नहीं है। एक मालिक के कहने पर उगाही करने निकल पड़ता है। दूसरा मालिक के ब्लैक मनी के कारोबार पर चुप्पी साध कर मौन समर्थन देता रहता है और काली कमाई से सेलरी के रूप में हिस्सा पाता रहता है। एड़ा बन के पेड़ा खाना इसी को कहते हैं।
2- केजरी गैंग जब मोदी गैंग से मात खाते हुए विदा विदाई की बेला में है तो लंबी लबी फेंक रहा है। ये कर दूंगा, वो कर दूंगा। अरे भइया पहले अपनी कुर्सी चुनावों में बचा लो, पहले अपने खोये कार्यकर्ता ढूंढ लो, तब आगे की सुध लेना। तुमसे कुछ न उखड़ेगा। तुम्हें संघिए भजपईये दिल्ली में अब पलिहर का बानर बना के दौड़ा दौड़ा कर मारेंगे और कोई बचाने तक न आएगा।

यशवंत सिंह की फेसबुक वॉल से
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