अब पत्रकारों का काम खबर दिखाना नही, खबरों के जरिये किसी न किसी को टपका डालना है?


दिल्ली के न्यूज़ चैनलों में पहले पत्रकार हुआ करते थे, अब ज्यादातर लोग शूटर हो गए हैं। कुछ सरकार के शूटर हैं तो कुछ विपक्ष के। इनका काम खबर दिखाना नहीं है, खबरों के जरिये किसी न किसी को टपका डालना है। नाम नहीं बताऊंगा, आप लोग जानते ही हैं।

हां, ये बात सच है कि सरकारी शूटर रामगोपाल वर्मा की फिल्म टाइप के हैं। जो मारुति ओमनी से जाते हैं, बीच सड़क पर कार रुकवाते हैं और दे दनादन दे दनादन गोलियां बरसाये। मरा या बचा देखे बगैर उड़ लेते हैं। पूरा हंगामा होता है, लेकिन पता चलता कि सेठ के बदले सेठ के कुत्ते को गोली मार कर चले आये।

जबकि विपक्ष में एक-दो शूटर शार्प शूटर हैं। सौ मीटर दूर से किसी झरोखे के पीछे साइलेंसर वाली गन लेकर शूट करते हैं, सीधा छाती पर। ऑन द स्पॉट काम तमाम। लोग समझते हैं बेचारा हार्ट अटैक से मर गया।

पुष्या मित्र की फेसबुक वॉल से
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