दीप्ति चौहान
एटा। जनपद में समय समय पर आवश्यकता अनुसार विभिन्न प्रकार के समाजसेवियों का जन्म होता रहा है,या फिर ये भी कहा जा सकता है,कि ये पानी के बुलबुलों की तरह पल भर को बने और फूट गए |
दरअसल इन में से कुछ तो वास्तविकता में समाजसेवा का ही कार्य कर रहे हैं और कुछ महानभाव ऐसे भी हैं जो मौसमी आम की तरह हैं |जनपद के विभिन्न राजनेताओं के रजनीतिक प्रष्ठभूमि में पदार्पण पर एक नजर डालिए खुद व् खुद समझ आजाएगा कि राजनीति में प्रवेश की पहली सीढ़ी समाजसेवा से ही शुरू होती है|
इतनी बड़ी संख्या में समाजसेवियों की फ़ौज होने बावजूद भी इस जनपद के विकास के आज तक लाले ही पड़े हैं हाँ एक विकास जरूर दिखाई देता है शहर के चौराहों और व्यस्ततम इलाकों पर या बिजली के पोलों पर कोई न कोई समाजसेवी आपको अपनी उपलब्धियां गिनाता हुआ होर्डिंग्स की शक्ल में लटका हुआ अवश्य ही मिल जाएगा |केवल मौके की तलाश करना और समाज के सामने चमकने भर को ही आप समाजसेवा की परिभाषा बना दें तो वे वास्तविक नायक कहाँ जाएंगे जो परदे के पीछे तो हैं पर जिस काम का बीड़ा लिया उसे सार्थक परिणाम देकर ही छोड़ा |
ना जाने कितने ही मानसिक अपंग लोग कूड़े ढेरों पर बैठे,बदहवास स्थिति में शहर की गलियों में घुमते हुए मिल जाएंगे आपको,ना जाने कितने आवारा पशु जो बीमारी या घायल अवस्था में दम तोड़ने को विवश हैं,दर दर भटकते हुए मिल जाएंगे,ना जाने घरों से निकाले हुए कितने ही वृद्ध और महिलाएं केवल एक वक्त की रोटी को भीख मांगने पर मजबूर हैं,ना जाने कितने ही बाल मजदूर चाय की दुकानों,होटलों,हथ ठेलों पर काम करके अपने बचपन की आहुति दिए जा रहे हैं सिर्फ इसलिए की वे अपना और आश्रितों का पेट भर सकें।
जहां एक ओर गरीबी के चलते बच्चे और महिलाएं नग्न अवस्था में गूमते मिलते हों वही दूसरी ओर आधुनिक फैसन की मरी अत्यधिक धनाड्य घर की औरतें हाई प्रोफाइल पार्टियों में अर्धनग्न अवस्था में घूमती मिल जाएंगी क्या इन लोगों को आस नहीं है किसी समाजसेवी के समर्थन और सहयोग की|ऐसे द्रश्य जब प्रतिदिन ही हमारे सामने आते रहते हैं तब ये महापुरुष,भविष्य के निर्माता क्या शीत निद्रा में चले जाते हैं,या इनकी आँखों पर मात्र सत्ता लोलुपता की पट्टियां ही बंधी हैं,ऐसा भी नहीं कि ये लोग धन नहीं खर्च करते पर जिनको आवश्यकता है ही नहीं उनको उपलब्ध कराना ये मानसिकता गले नहीं उतरती क्यूंकि शहर में रजिस्टर्ड भिकारियों की संख्या भी कुछ कम नहीं है,असल में ये वो ठेकेदार लोग हैं जो समाजसेवियों को उनके असली मुकाम तक पहुँचाने का कार्य करते हैं |
