अलीगढ़। वर्तमान में प्रदेश के सहायता प्राप्त अशासकीय माध्यमिक विघालयों में बडी संख्या में वर्षों से तदर्थ रूप से नियुक्त प्रधानाचार्य कार्यरत है। पिछली सरकारों द्वारा उनके विनियमित किये जाने की सार्वजनिक घोषणा अनेक बार की, परन्तु वे सब घोषणा मात्र ही रही है। प्रदेश के तदर्थ प्रधानाचार्य अपने विनियमित होने के सपने देखते रहे।
तदर्थ प्रधानाचार्य बड़ी विकट स्थिति में अपने विद्यालय का संचालन दक्षतापूर्ण ढंग से कर रहे हैं तथा पहले से बेहतर परिणाम व परीक्षाफल दे रहे हैं। शासन द्वारा उनकी न्यायपूर्ण मांग पर कोई ध्यान नहीं दिया जा रहा है। जबकि उनके विनियमित किये जाने से शासन पर कोई वित्तीय भार नही पड़ता है।
ज्ञापन में कहा गया है कि पूर्ववर्ती सरकार द्वारा 14 सितम्बर 2007, 23 जनवरी 2008, 15 फरवरी 2008, 11 अप्रैल 2008 आदि में विनियमितकरण हेतु पत्र जारी हुए परन्तु वे सब छलावा ही साबित हुये और 10 व 15 वर्ष से निरन्तर कार्यरत तदर्थ प्रधानाचार्यो को नियमित नही किया गया। तदर्थ प्रधानाचार्य अपने विनियमितीकरण की मांग शासन से लगातार करते आ रहे हैं। किसी भी शिक्षक संघ अथवा प्रधानाचार्य परिषद् द्वारा तदर्थ प्रधानाचार्यां की विनियमितीकरण की न्यायपूर्ण मांग पर कोई ध्यान नहीं दिया और न ही कभी इसे अपना मुददा ही बनाया जबकि प्रदेश मे सहायता प्राप्त अशासकीय विद्यालयों मे 70 से 80 प्रतिशत की संख्या में है जबकि प्रदेश में लगभग 5000 की संख्या मे तदर्थ प्रधानाचार्य कार्यरत हैं। चयन बोर्ड द्वारा लम्बे समय से किसी भी प्रधानाचार्य का चयन नही कर सका। जबकि विद्यालयों में कार्यरत तदर्थ प्रधानाचार्य अपने-अपने विद्यालयों में वरिष्ठतम शिक्षक/प्रवक्ता हैं तथा अपने विद्यालय के परिवेश एवं परिस्थितियों से भली भांति अवगत है तथा पद पर कार्य करने का लम्बा अनुभव प्राप्त कर चुके हैं। शासन से प्रधानाचार्य पद का वेतन प्राप्त कर रहे हैं, पद की पूर्ण योग्यता रखते है। सरकार को इन्हे विनियमित करने से किसी भी प्रकार का वित्तीय भार वहन नहीं करना पडेगा। लेकिन पूर्ववर्ती सरकारों द्वारा महज घोषणा एवं कागजी कार्यवाही ही की जाती रही है। इसी से क्षुब्ध होकर प्रदेश के सभी तदर्थ प्रधानाचायों को एकजुट होकर विनियमितीकरण के लिये संघर्ष का रास्ता चुनना पडा एवं प्रदेशीय तदर्थ प्रधानाचार्य वेलफेयर एसोसिएशन उप्र का गठन कर पंजीकरण कराया गया। एसोसिएशन की प्रदेश कार्यकारिणी की पहली बैठक 17 अप्रैल 2017 को विवेकानन्द सरस्वती विद्या मंदिर इं.कॉ. बुलन्दशहर में हुई। जिसमें प्रदेश भर से आये तदर्थ प्रधानाचार्यों एवं पदाधिकारियों ने उपस्थित होकर सर्वसम्मति से निर्णय लिया कि विनियमितिकरण हेतु प्रदेश के सभी जिला विद्यालय निरीक्षक कार्यालय पर 15 मई 2017 को शांतिपूर्ण ढंग से धरना आयोजित किया जायेगा तथा उक्त संबध में एक सूत्रीय विनियमितीकरण सम्बंधी ज्ञापन जिला विद्यालय निरीक्षक के माध्यम से शिक्षामंत्री उप्र सरकार को प्रेषित करेंगें व 5 जून 2017 को मण्डलीय कार्यालयों पर धरना आयोजित कर अपनी मांग के संबध में संयुक्त शिक्षा निदेशक मण्डलीय द्वारा अपना ज्ञापन सरकार को प्रेषित करेंगें। प्रदेश की वर्तमान सरकार और उसकी कार्यप्रणाली पर सभी तदर्थ प्रधानाचार्यो को पूर्ण विश्वास है कि हमारी न्यायोचित मांग को अवश्य ही पूरा करेगें।
ज्ञापन देने वालों में राजेंद्र सिंह, योगेश कुमार, जितेंद्र राही, राकेश यादव, राजनारायन सिंह, धर्मवीर सिंह, सतीश चंद्र वार्ष्णेय, हरिकिशन, मंगलसेन, नगेंद्र सिंह चौहान, श्यौराज सिंह, विष्णु शर्मा, मुकेश पिप्पल, राजमोहन आदि प्रधानाचार्य उपस्थित थे।
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