मेहदी हसन एैनी क़ासमी
आज से ठीक ढाई महीने पहले भारत के एक नेशनल चैनल पर *फतेह का फतवा* नामक कार्यक्रम शुरू हुआ। जिसे पाकिस्तानी मूल कैनेडियन नागरिक तारिक फतेह होस्ट कर रहा था।
यूं तो कश्मीर में जारी कर्फ्यू के दौरान स्थिति को सुधारने के लिए अगस्त 2016 में बुलाए गए राज्यसभा सत्र में विपक्ष के नेता गुलाम नबी आजाद ने तारिक फतेह का कच्चा चिट्ठा पेश किया था और गृहमंत्री से इस पर रोक लगाने की मांग की थी, लेकिन तब किसी ने इस पर ध्यान नहीं दिया।
धीरे धीरे तारिक फतेह देश के सभी बड़े चैनलों पर जहर बकने लगा और फिर ज़ी न्यूज़ ने उसे होस्ट बनाकर भारत के इतिहास का सबसे विवादास्पद कार्यक्रम शुरू किया। जिससे पूरे देश में नफ़रत,चिंता और सरासीमगी की स्थिति फैल गई। देश के बहुमत और अल्पमत के बीच खाई पैदा होने लगी। इस शो के दूसरे Episode के प्रसारण होते ही देश के कई बड़े पत्रकारों और बुद्धिजीवियों ने सोशल मीडिया के माध्यम से आवाज उठाई।
जिनमें वदूद साजिद साहब उल्लेखनीय हैं।
*अल्लाह का इस्लाम और मुल्ला इस्लाम* जैसा विवादस्पाद विचार पेश करके तारिक फतेह ने उलमा व मदारिस इस्लामिया को निशाना बनाना शुरू किया। फतवा और जिहाद के बारे में बेहद अपमानजनक और सांप्रदायिकता पर आधारित टिप्पणियों, बुर्का, तलाक और हलाला के बारे में झूठे आरोप लगाकर तारिक फतेह दो Episodes से ही सांप्रदायिक ताकतों का नूर ए नज़र बन गया।
बिना तैयारी के कार्यक्रम में भाग लेने वाले मौलवियों की हज़ीमत ने यह संदेश दिया कि किसी मौलवी में तारिक फतेह का जवाब देने की सकत नहीं है। तभी युवा इस्लामी विद्वान मुफ्ती यासिर नदीम वाजिदी ने यूट्यूब द्वारा तारिक फतेह का सर्जिकल स्ट्राइक शुरू किया और इसे सार्वजनिक रूप से बहस के लिए चुनौती किया, लेकिन उसने ज़ी न्यूज़ के कवच से बाहर आने से इनकार कर दिया।
तीसरे Epissode में इस्लामी खलीफा सैयदना उमर बिन ख़त्ताब रज़ियल्लाहु अन्हु पर तारिक फतेह के हमले ने युवाओं की ग़ैरत को ललकारा,देखते ही देखते तारिक फतेह और ज़ी न्यूज़ के खिलाफ कुछ लोगों के संघर्ष ने अभियान का रुख कर लिया। हम यू.टयूब से निकलकर ट्विटर पर पहुंच गए और तारिक फतेह का जमकर ट्रोल किया और एक सफल ट्विटर ट्रेंड के माध्यम से *फतेह का फतवा* कार्यक्रम पर प्रतिबंध लगाने की राष्ट्रव्यापी आवाज उठाई।
दूसरी ओर देश भर से ज़ी.न्यूज के इस कार्यक्रम के खिलाफ क़ानूनी कार्रवाई की आवाज उठने लगी। सबसे पहले हमने राष्ट्रीय उलेमा काउंसिल को चुनाव आयोग भेजकर तत्काल व्यावहारिक कदम उठाने की अपील की। फिर इस कार्यक्रम के प्रायोजकों के खिलाफ एक अॉनलाईन पेटीशन डाली। पांच हजार हस्ताक्षर के बाद ASIAN.PAINTS ने ज़ी न्यूज़ से अपना रिश्ता तोड़ लिया।
उधर आपसी सलाह के बाद सुप्रीम कोर्ट के वकील हिफ़ज़ुर्रहमान खान ने अपने वकील दोस्त फरहान खान और फ़्राह हाशमी द्वारा एक पेटीशन हाई कोर्ट में दाखिल कर दी। जिसकी पहली सुनवाई में ही हाई कोर्ट ने सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय भारत सरकार को नोटिस भेजकर जवाब मांगा।
विशेषज्ञ वकीलों की टीम से बातचीत के बाद देश भर में तारिक फतेह और ज़ी न्यूज़ के खिलाफ़ FIR दर्ज कराने का सिलसिला शुरू किया गया। शुरुआत में काफी दिक्कतें आईं। देवबंद, मुंबई, मालियर कोटला, गंगोह, सहारनपुर, लखनऊ, कोलकातालातूर, औरंगाबाद और बुलंदशहर आदि के प्रशासन को ज्ञापन सौंपे गए,और एफ़.आई.आर दर्ज करने की अपील की गई।
अंततः बुलंदशहर के खुर्जा थाने में मौलाना खालिद साहब कासमी की तरफ़ से तारिक फतेह के खिलाफ एफ़.आई.आर दर्ज की गई, उसी के बाद देवबंद में महिलाओं का विरोधी जुलूस भी देखने को मिला और फिर बड़ी कोशिशों के बाद तारिक फतेह के खिलाफ देवबंद में भी FIR दर्ज कर ली गई।
हाई कोर्ट की नोटिस, दो एफ़.आई.आर, और विभिन्न स्थानों पर विरोध प्रदर्शनों और तहरीरों से ज़ी न्यूज़ पर दबाव बन गया। छठे Episode से तारिक फतेह बहुत संभलकर बोलने लगा. मुक़दमा दर्ज होने के बाद ट्विटर समेत सोशल मीडिया और देश भर से तारिक फतेह की गिरफ्तारी या उसे निर्वासित करने की मांग बढ़ने लगी। यहां तक कि 13 मार्च को तारिक फतेह के वीजा की अवधि पूरी होने के बाद विदेश मंत्रालय ने उसके वीजा की अवधि बढ़ाने से इनकार कर दिया और यूँ उसे बांग्लादेश को वीजा देकर भारत वापस भेज दिया गया।
चूंकि पहले दिन से हमारा टारगेट ज़ी न्यूज़ चैनल की सांप्रदायिक पत्रकारिता थी। इसलिए हमने राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री,सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय आदि को पक्ष बनाकर एक ऑनलाइन पेटीशन दायर की थी। जिस पर पूरी दुनिया से दस हजार लोगों ने हस्ताक्षर किए थे। साथ ही हमने सुचना एवं प्रसारण मंत्रालय, गृह मंत्रालय और विदेश मंत्रालय को पत्र लिखकर इस कार्यक्रम के बारे में पूरी जानकारी भेजकर तुरंत ज़ी न्यूज़ चैनल के खिलाफ कार्रवाई करने की मांग की थी।
14 मार्च को केंद्रीय सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय से हमें एक जवाबी पत्र प्राप्त हुआ जिसके अनुसार *फतेह का फतवा* कार्यक्रम के सभी CD * NEWS BROADCASTERES ASSOCIATION * को सौंप दिए गए हैं और एसोसिएशन को बाध्य किया गया है कि इस कार्यक्रम की पूरी जांच करके जल्द मंत्रालय को रिपोर्ट सौंपी जाए।
उल्लेखनीय है कि इस अभियान में देश भर से हजारों युवाओं ने भाग लिया। वकीलों और बुद्धिजीवियों की टीम ने हर तरह की मदद की। ट्विटर के दोनों ट्रेंड में बड़े Activists अलावा हजारों लोगों ने भाग लिया। उलमा की एक बड़ी जमात ने इस अभियान की सराहना की।
अभी भी कई स्थानों पर एफ़.आई.आर दर्ज कराने और PIL दाख़िल करने का सिलसिला जारी है। निश्चित रूप से इस अभियान में शरीक सभी मित्र, चाहे उनसे हमारा संपर्क है या वह दृश्य में ना आकर अपना सहयोग प्रदान कर रहे हैं उनका अजर् व सवाब उस खुदा के पास सुरक्षित है जिसके हबीब की मुहब्बत में उन मित्रों ने अभियान को यहां तक पहुंचाया।
हमें तो इस अवसर पर अपने सभी दोस्तों से कुछ बातें कहनी हैं,
01.ज़ी न्यूज़ चैनल जो लम्बे समय से भारत में सांप्रदायिकता का बीज बो रहा है। हमारा उद्देश्य पहले दिन से इस चैनल को लक्ष्य बनाकर उसे फाश करना और उसके खिलाफ ठोस कानूनी कार्रवाई करना था। इसलिए हम हर तरह से उसे घेरने की कोशिश की और अब तक इसमें बड़ी सफलता मिली है और आगे भी यह अभियान जारी रहेगा और हम तब तक नहीं रुकेंगे जब तक ज़ी न्यूज़ को आईना दिखाने में सफलता नहीं मिलती। इसलिए क़ानूनी कार्रवाई के सिलसिले में जो लोग प्रयासरत हैं हम पूरी तरह से उनके साथ कदम बकदम खड़े हैं और हर तरह से उनका सहयोग करते रहेंगें.
02.तारिक फतेह जैसे लोग सांप्रदायिक ताकतों का हथियार बन कर हमारे देश में नफरत की आग भड़काने की कोशिश करते हैं। मीडिया और कुछ कम्यूनल तत्वों का उन्हें समर्थन मिल जाता है, इसलिए रणनीति तैयार कर न्यायपालिका के माध्यम से ऐसा मजबूत कदम उठाना अनिवार्य है जिससे तारिक फतेह जैसे सभी इस्लाम दुश्मन लोगों पर प्रतिबंध लगाने में कामयाबी मिल सके और कम से कम भारतीय मीडिया में ऐसे लोगों का हुक्का-पानी बंद हो।
03.इॊ अभियान में भाग लेने वाले और हर बात पर आँख बंद करके लब्बैक कहने वाले युवाओं की सेवा में अर्ज़ कर देना चाहता हूँ कि आप यह कोशिशें शुरुआत है। यहां रुकने की जरूरत नहीं है, बल्कि लोकतांत्रिक और कानूनी रूप से एकजुट होकर कदम बढ़ाएं। हो सकता है तारिक फतेह या उस जैसा कोई व्यक्ति फिर हमारे देश में आकर हमारे धार्मिक भावनाओं को आहत करने की कोशिश करे और कोई मीडिया चैनल ऐसे व्यक्ति को पनाह दे दे। इसलिए जब तक ज़ी न्यूज़ के खिलाफ उच्च न्यायालय और सरकार मजबूत कानूनी कार्रवाई न करे। अभिवयक्त की स्वतंत्रता के नाम पर मीडयाई आतंकवाद और सांप्रदायिकता के खिलाफ कोई बिल ना आजाये। ना तो हम रुकेंगे और ना ही थकेंगें.
हमें न्यायपालिका और प्रशासन पर विश्वास है कि वह इस देश की संस्कृति, लोकतंत्र और यहां के मुसलमानों की भावनाओं का सम्मान करते हुए ठोस कदम उठायेंगें. इसलिए देश भर के इंसाफ़ व अमन पसंद लोगों से से गंभीरता के साथ अपील है कि इस आंदोलन को मजबूती करें। हर शहर में सांप्रदायिक चैनलों के खिलाफ अदालतों का दरवाजा खटखटायें.
RTI दायर करके सरकार से जवाब तलब करें। सोशल मीडिया का सही इस्तेमाल करके इन तत्वों को उजागर करें और यह साबित करें कि हमें न्यायपालिका पर भरोसा भी है और हम कानून का सहारा लेकर अपने धर्म की रक्षा करने और देश की एकता और सद्भाव को बचाने में भी समर्थ हैं। हमें अल्लाह की ज़ात से विश्वास है कि शायद यही कोशिश एक बड़े आंदोलन का रूप धारण करके मुल्क के अमन व सुकून के लिये टॉनिक का काम करेगा.
इंशाअल्लाह
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