बेदर्द हाकिम फरियाद क्या करें, नोटबंदी का दर्द अब आँखों से छलकने लगा?


अमन पठान/गणेश मौर्य
अम्बेडकरनगर। नोटबंदी के 43 दिन बाद भी आम आदमी की तकलीफें कम नही हुईं। मोदी सरकार 126 बार नोटबंदी के नियम बदल चुकी है और इन नियमों के बदलाव का दंश आम जनता को झेलना पड़ रहा है। अब नोटबंदी का दर्द लोगों की आँखों से छलकने लगा है।
अम्बेडकरनगर के गांव रामपुर सकरवारी बड़ौदा क्षेत्रीय ग्रामीण बैंक लोगों को मोदी सरकार के नियमों के अनुसार कैश नही दे रही है। जानकारी मिलने पर केयर ऑफ़ मीडिया न्यूज़ नेटवर्क की टीम मौके पर पहुंची तो लोगों का दर्द आँखों से छलकने लगा। बैंक के बाहर मौजूद लोगों से बातचीत की गई तो उन्होंने बताया कि वह एक महीने से बैंक के चक्कर लगा रहे हैं, लेकिन पैसा नही मिल पा रहा है। एक महिला ने बताया कि वह दस दिन से लगातार 10 किलो मीटर पैदल चलकर पैसे निकालने के लिए बैंक आ रही है और उसे रोजाना बैंक से निराश लौटना पड़ रहा है।
एक महिला ने रो रोकर अपना दुखड़ा सुनाते हुए बताया कि उसके बेटे का हादसे में पैर टूट गया है। बेटे के इलाज के लिए वह रोज पैसे निकालने बैंक आती है और उसका नंबर आते ही बैंक में कैश ख़त्म हो जाता है। एक छात्र ने बताया कि बैंक कर्मियों की हठधर्मिता चरम पर है। उसे कालेज की फीस जमा करने के लिये 2000 रूपये की पर्ची भरी, लेकिन कैशियर ने उसे सिर्फ 500 रूपये देकर बैंक से विदा कर दिया। बैंक के अंदर-बाहर मौजूद लोगों की समस्याएं अलग-अलग थीं, लेकिन तकलीफ एक ही थी।
इस वीडियो में देखिये जनता की तकलीफ

देखिये जनता के आरोप पर क्या कहते हैं शाखा प्रबंधक

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