धीरज तिवारी
लखीमपुर खीरी क्षेत्र में महिलाओं पर आये दिन बल्तकार, उतपीडन, घरेलू हिंसा के प्रकरण तो आये दिन सामने आते रहते हैं परन्तु उनके हक व न्याय के लिये वैसे तो मुख्यमंत्री अखिलेश यादव तो तरह तरह की योजनाआें का क्रियान्वन कर रहे हैं जबकि इसके बिपरीत लखीमपुर की पुलिस इतनी उदासीन हैं कि पीडित महिला को न्याय दिलाने में मद्द करे इसकी जगह पीडित से ही बदसूलकी की घटनाये सामने आई है इतना ही नही मुदमा दर्ज करना तो पीडिता की समुची घटना को फर्जी बताने से नही चुकते हाल में खीरी में बालिका के साथ सामूहिक दुष्कर्म हुआ जिसकी आज तक सिर्फ जॉच ही चल रही हैं दुसरा प्रकरण दो दिन पहले ही महेवागंज में हुये बल्तकार की घटना पर पुलिस ने फिर नजरदांज किया और अपराधियों को संरक्षण देने का काम किया न्याय न पाने पर उस पीडिता ने अपने उपर मिट्टी का तेल डालकर खुद को जलाने को प्रयास किया किसी तरह उसकी जान बचाई गई मामला जब तूल पकडने लगा तब पुलिस खानापुर्ति में लग गई अगर पुलिस अपना रवैया नही बदलती हैं तो शहर की बहू बेटिया अपनी आवाज कैसे उठायेगी अपने साथ हो रहे अन्याय के खिलाफ कैसे खडी होगी क्योकि न्याय के पहरी पुलिस ही अपराधियों का प्रत्यक्ष और परोक्ष रूप से साथ देगी तो इससे तो महिलाओ का कानून से विश्वास ही उठ जायेगा नावांगत आये पुलिस अधिक्षक को पुलिस की कार्य प्रणाली को गम्भीरता से लेना होगा ताकि माताये और बहनो की आबरू सुरक्षित रहेगी और वो अपने साथ हो रहे अन्याय के खिलाफ आवाज उठा सकेगी और अन्याय से लड सकेगी तथा अपराधी थर-थर कापेंगे जिससे हो रहे अपराधो पर लगाम लगेगी।
