खान अशु
उस दीवार का कद कमोबेश 25-30 फुट होगा, जिसने भोपाल सेन्ट्रल जेल को घेर रखा है। इस दीवार को भी चिकनाई और नुकिलेपन ने यह कुवत दे रखी है कि कोई आसानी से इसपर चढ़ न पाए, किसी तरह चढ़ भी जाए तो दूसरी तरफ की गहराई दस-बीस हड्डियां तोड़ने के लिए पर्याप्त है।
जेल के जिस बी ब्लॉक की खास कस्टडी में सिमी आतंकियो को कैद किया गया था वह जेल के मुख्य गेट से कम-अज-कम आधा किमी की दूरी पर होगी। इस बीच भी मुख्य गेट की सुरक्षा के अलावा ए ब्लॉक पर तैनात जवान, उसके बाद करीब तीन स्थानों पर चौकिया और उनपर मौजूद प्रहरी। इसके अलावा खास सुरक्षा व्यवस्था में रखे गए इन खास मेहमानों पर लगी विशेष निगरानी टुकड़ी।
सीसीटीवी कैमरे, वाच टावर, गश्त पर लगे जवानों से लेकर दस तरह के हडल्स।
जिन्हें सबसे खतरनाक और खुखार मानकर जेल की खास सेल में रखा जाता है, दिन के उजाले में भी खाने, नहाने, पेशी, मुलाकात से लेकर नमाज तक पढ़ने में खास अहतियात रखा जाता है, वह रात के अंधेरे में सारी बाधाएँ तोड़ते हुए जेल से भाग जाते हैं। जाते हुए एक प्रहरी का गला भी रेत जाते हैं। पेशे से डाक्टर, इन्जिनियर, शिक्षा और बड़े कारोबार से जुड़े इन खुखार लोगों के पास जेल में हथियारों का जखीरा जमा कर लेने का जादू भी याद था।
सारी रात चले अढाई कोस की कहावत चरितार्थ करते यह आतंकियो को मौत से पहले के सफर के लिए नए कपड़े, जूते भी आसानी से मुहैया हो गए।
जेल प्रबंधन की सरपट खोजबीन और तत्पर कार्रवाई का यह आलम कि चन्द घण्टों में आतन्कियो को खोज भी निकाला और सरपट उनका खातमा कर देश की छाती पर आतंक परोसने वालों को सबक दे डाला। यह बात अलग है कि न तो सारी जेल में मौजूद सीसीटीवी कैमरे भागने वालों को कैद कर पाए, न सायरन ने अपनी ड्यूटि निभाई, निगरानी टावर खामोश रहे, पेट्रोलिंग टीम सोई रही!
और यह मौका-ए-जश्न
किसी को किसी भी बात पर देशद्रोही करार दे दिया जाना कभी नेताओं की फितरत हुआ करती थी, अब सोशल मीडिया के जाबाज लेखकों ने यह ठेकेदारी ले रखी है। एनकाउन्टर की बारीकियों को लेकर उठने वाले सवालों पर धडल्ले से आतंकवाद का समर्थक निरूपित किया जा रहा है। इस बात को दरकिनार कर कि "मौत" एनकाउन्टर की हो, हादसे की, बीमारी की या फिर सहज अपने साथ किसी को लेकर जाती है, किसी परिवार के मातम पर खुशियों से फूली छाती कैसे शोभा दे सकती है?
पुछल्ला
मप्र दिवस का तोहफा!
एक नवंबर यानी मप्र का स्थापना दिवस इस बार पूरे देश के लिए यादगार बन गया। एक एनकाउन्टर ने देशभर में मचे पुराने विवादों पर विराम लगा दिया, जिस तरह पहले सर्जिकल स्ट्राइक को ट्रिपल तलाक़ मुद्दा खा गया था, तीन तलाक पर एनकाउन्टर आया है, इसपर भी कोई नया मुद्दा सोच-समझकर रखा गया होगा, जैसे अब तक होता आया है।
