भोपाल एनकाउंटर मुसलमानों के लिए एक सबक है?


अमन पठान
सवाल ये नही टूटा के बच गया शीशा।
सवाल ये है पत्थर किधर से आया है।।
हिंदुस्तान में मुसलमान आतंकवाद का पर्यायवाची बनकर रह गया है। कहीं पटाखा भी फूटता है तो उसका जिम्मेदार भी मुसलमानों को ठहराया जाता है। इस हुकूमत में अब तो ये भी डर है कि रोजी रोजगार के लिए घर से बाहर गए मुस्लिम नौजवान सकुशल घर लौट आएंगे या नही?  भोपाल एनकाउंटर मुसलमानों के लिए एक सबक है। जानिए क्यों और कैसे?
न्यूज़ चैनल, अख़बार और सोशल मीडिया के माध्यम से फर्जी भोपाल एनकाउंटर की सच्चाई सामने लाई जा रही है। मैं जेल से भागने से लेकर एनकाउंटर तक की झूठी कहानी का और ज्यादा हवाला नही दूंगा। लेकिन इतना जरूर कहूंगा ये एनकाउंटर प्री प्लान है। जिस दिन से देश में मोदी सरकार बनी है। उस दिन से सिर्फ और सिर्फ मुसलमानों को निशाना बनाया जा रहा है।
गौमांस के शक में अख़लाक़ की पीट पीटकर हत्या का मामला हो या लव जिहाद, घर वापसी, गौ मांस, गौ रक्षा, असहिष्णुता, शाहरुख़ खान, आमिर खान, सलमान खान, कन्हैया, भारत माता की जय, वन्दे मातरम, सर्जिकल स्ट्राइक या आतंकी घटना से जुड़ा कोई भी मामला हो उसमे मुसलमानों को जरूर घसीटा जाता है और आतंकी को तोहमत लगाई जाती है।
मैंने अक्सर देखा है जब भी पीएम मोदी कोई बयान या नया कानून लागू करते हैं तो उनकी जमकर आलोचना और फजीहत होती है या उनका कोई मुद्दा विकराल रूप ले लेता है तो देश में कोई न कोई नया मुद्दा सामने आ जाता है। गुजरे दिनों की यादें ताजा न करते हुए ताजा मामलों को दोहरा देता हूँ। सर्जिकल स्ट्राइक को लेकर देश में जो घमासान हुआ। उससे आप अंजान नही है। जब सर्जिकल स्ट्राइक के मुद्दे ने तूल पकड़ा तो देश को ट्रिपल तलाक का नया मुद्दा मिल गया और ट्रिपल तलाक पर पीएम मोदी की फजीहत होने लगी तो अब भोपाल एनकाउंटर के रूप में देश को नया मुद्दा मिल गया है।
जिस दिन से देश में मोदी सरकार बनी है उसी दिन से एक के बाद एक ऐसे मुद्दे सामने आ रहे हैं। किसी न किसी बहाने मुसलमानों को निशाना बनाया जा रहा है। भोपाल एनकाउंटर ने ये साबित कर दिया है। आज जेल में बंद मुसलमानों को जेल से निकालकर मारा है। कल मुसलमानों को घरों से निकालकर मारा जायेगा और कोई कुछ नही कर पायेगा। अगर कोई तानाशाही का विरोध करेगा तो मुसलमानों की मौत पर जाँच का कफ़न डाल दिया जायेगा और फैसला आरोपियों की मौत के बाद आएगा।
अब मैं असल मुद्दे पर आता हूँ। मुसलमानों का दीन से दूर होने और आपसी फूट ही मुसलमानों की बर्बादी का सबब बन रही है। सबसे बड़ी बात तो ये है कि हिंदुस्तान में मुसलमानों का कोई रहनुमा नही है और मुसलमान अपना कोई एक रहनुमा चुनना भी नही चाहते हैं। कोई कांग्रेस का झंडा बुलंद कर रहा है तो कोई मुलायम सिंह की धोती छोड़ना नही चाहता तो कोई मायावती का मुरीद है। कोई खुद को मुस्लिम हितैषी साबित करने के लिए असदुद्दीन ओवैसी का कमरबंद पकड़कर लटका हुआ है।
सच्चर कमेटी की रिपोर्ट के मुताबिक देश में मुसलमानों की आबादी 15.2 प्रतिशत और भारत की जेलों में 23.4 प्रतिशत मुसलमान कैद हैं। वहीं दिल्ली में मुसलमानों की आबादी 11.7% जेल में 27.9% और महाराष्ट्र में 10.6% और जेल में 32.4% प्रतिशत मुसलमान जेल में सजा काट रहे हैं। जेल में बंद 50 प्रतिशत मुस्लिम कैदी बेगुनाह हैं। इनकी रिहाई के बारे में कोई सोच नही रहा। जेल से निकालकर मुस्लिम कैदियों को एनकाउंटर में मारा जा रहा है। एनकाउंटर में मारे गए जिन लोगों को आतंकी बताया जा रहा है। वह जेल में विचाराधीन कैदी थे। उनका गुनाह और बेगुनाही साबित होना बाकी थी।
इस शेयर के साथ बात ख़त्म
पाबंद रहो रश्म-ए-वफ़ा कोई नही है।
क्या मैं ये समझ लूँ कि मेरा कोई नही है।।
होशियार, खबरदार मेरे काफिले वालों।
रहजन हैं यहाँ सब राहनुमा कोई नही है।।
इंसाफ की उम्मीद अदालत से न रखना।
इस दौर में कातिल की सजा कोई नही है।।
क्या पेश करूँ इस मुंसिफ की नजर में।
कातिल वही है जिसकी खता कोई नही है।।

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