कानपुर। इंदौर-पटना एक्सप्रेस कानपुर के पास बड़े हादसे का शिकार हो गई। ट्रेन के 14 डिब्बे पटरी से उतर गए। इस हादसे में 115 लोगों की मौत हो गई और 200 से अधिक लोग घायल हैं। ट्रेन हादसे में घायल लोगों को देखने के लिए रविवार दोपहर को रेल राज्यमंत्री मनोज सिन्हा जिला अस्पताल पहुंचे। इस दौरान उन्होंने मामूली रूप से घायलों की मदद के लिए 5000 रुपए दिए, लेकिन इसमें 500 रुपए के बैन नोट भी बांट दिए। इस पर कुछ घायलों ने पैसे लेने से मना कर दिया।
न्यूज़ २४ के अनुसार कानपुर देहात जिला अस्पताल में भर्ती पटना की रहने वाली रंजो देवी ने बताया कि वह इंदौर से आ रही थी। इस ट्रेन हादसे में उनकी पीट और कमर में चोट लगी है। दोपहर में रेल राज्यमंत्री मनोज सिन्हा आए थे। उन्होंने घायलों को 5000-5000 रुपए बांटे, जिसमें 500 रुपए के पुराने भी नोट थे।
हमें भी 5000 रुपए दिए, लेकिन उसमें 500 रुपए के पुराने नोट होने की वजह से लेने से मना कर दिया।
रंजो के अनुसार, जब सरकार ने खुद 500 और 1000 रुपए के नोट बंद कर दिया है, तो फिर हमें क्यों बांटे जा रहे हैं। क्या ये लोग हमें मुर्ख समझ रखे हैं। एक तो घायल हैं और दूसरे नोट चेंज कराने के लिए घंटों लाइन में खड़े होने जाएं।
जिला अस्पताल में भर्ती बहराइच की रहने वाली अश्वनी ने बताया कि वह इंदौर से अपने चाचा दयाराम मिश्रा और चाची मालती मिश्रा के साथ आ रही थी। ट्रेन हादसे के बाद चाचा दयाराम लापता हैं, जबकि चाची भी मेरे साथ अस्पताल में भर्ती हैं। उन्होंने बताया कि रेल राज्यमंत्री मनोज सिन्हा अस्पताल में घायलों को देखने के लिए थे।
इस दौरान मंत्री जी ने मामूली रूप घायलों को 5000-5000 रुपए दिए। इसमें 500 रुपए के भी नोट हैं, लेकिन क्या करें, मजबुरी में मैंने ले लिया। सोचा कि चलो यहां से जाने के बाद इसे बैंक में चेंज करा लेंगे।
एडीआरएम ने ये कहा...
एनसीआर इलाहाबाद के एडीआरएम अनिल द्विवेदी ने बताया कि कुछ लोगों के हाथ में हमने भी 500 कि नोट देखें हैं, लेकिन हमें इसकी जानकारी नहीं है कि किसने इन नोटों को बांटा है। हमारे पास बांटने के लिए पर्याप्त करेंसी है। इसकी कोई कमी नहीं है।