केजरीवाल में ज्यादा हवा भरने की गुंजाइश नहीं बची है Madan Tiwary जी. नहीं मानिएगा और भरते रहिएगा तो अप्राकृतिक दुर्घटना हो जाएगी और वो फट जाएगा...जिससे अंग प्रत्यंग छितरा जाएगा... देखिएगा, कार्यकाल पूरा होते वह खुदे राजनीति छोड़ कर भाग जाएगा... कहेगा कि कहां फंस गया था, एनजीओ वाला कमवा ही ठीक था :
संघियों-मुसंघियों से यह नकली क्रांतिकारी तो कतई नहीं लड़ पावेगा जिसकी खुद की कोई विचारधारा नहीं है... इसमें पहले ही कई टन हवा हम लोगों ने भर रखा था / या यूं कहिए कि वह खुदे भरवा रहा था... इस दबाव को रिलीज करने में जुटा हुआ है... सू सू फू फू करके धीरे धीरे अब तक वह काफी हवा निकाल चुका है.
केजरी को अपने असली औकात में आने दीजिए.. देख रहे हैं कि कुछ लोग फिर उसे महान, योद्धा, क्रांतिकारी, जनता का आदमी, मोदी को मात देने की क्षमता रखने वाला, मध्यमवर्ग का हीरो आदि इत्यादि बताकर फिर से फटाफट हवा भरने पर उतारू हैं. पक्का कह रहा हूं, फटाक से फट जाएगा भाई, आपको अंदाजा भी नहीं लगेगा कि इतना जल्दी कैसे फट गया... :)
जाने दीजिए, रहम करिए. हवा एक बार पूरा निकल जाने दीजिए ताकि पहले तो वह खुद ही काफी आजाद सहज महसूस कर पाए और फिर हम लोग भी थोड़े विकल्पहीन होने के बाद रीयल विकल्प तलाशने को तत्पर हो सकेंगे.
यशवंत सिंह की फेसबुक वॉल से
(यशवंत सिंह भड़ास 4 मीडिया के संपादक हैं)
