उत्तर प्रदेश: मशहूर समाज सेवी डॉ. सिराजुद्दीन हाशमी ने एक हिन्दू लड़की को डॉक्टर बनाने का सपना पूरा करने का बीड़ा अपने सिर उठा लिया है।
अमरोहा में किराए के मकान में रहने वाली निकेता के पिता तीन दिन पहले ब्रेन ट्यूमर होने के कारण दुनिया से अलविदा कह गए।
निकेता ने इकलौती बेटी होने का फर्ज निभाते हुए अपने पिता का अंतिम संस्कार किया। लेकिन पिता का साया सिर से उठ जाने के बाद परिवार बेसहारा हो गया है।
जिसे देखते हुए सिराजुद्दीन हाशमी ने निकेता की मदद के लिए हाथ आगे बढ़ाये।
निकेता के पिता ने अपनी बेटी को डॉक्टर बनाने का जो सपना संजोया था उसे अब डॉ. हाशमी साकार करेंगे। जिसके लिए होने वाला सारा खर्च वह खुद उठाएंगे। घर का खर्च आसानी से चल पाए इसके चलते निकेता की मां गीता देवी को भी अपने काॅलेज में टीचर की नौकरी पर रखेंगे।
निकेता के घर जाकर डॉ. हाश्मी ने उसे किताबों के साथ कुछ धनराशि का चेक देते हुए कहा कि मेरी दो बेटियां हैं। लेकिन अब तुम भी मेरी बेटी बन गई हो। ये बात सुनकर निकेता इतनी भावुक हो गई कि आंसू छलक आए।
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