- डीएम ने राजस्व आयुक्त को भेजी जांच रिपोर्ट
- तहसीलदार व कानूनगो की बीच बातचीत का ऑडियो हुआ था वायरल
सुनील कुमार
एटा - एक वर्ष पूर्व सदर तहसीलदार व कानूनगो के बीच वायरल हुए पैसा मांगने के ऑडियो मामले में नया मोड़ आ गया है | शासन के आदेश पर हुई जांच में तहसीलदार को क्लीन चिट मिल गई है | कानूनगो को षणयंत्र का आरोपी बताया गया है | डीएम ने राजस्व आयुक्त को जांच रिपोर्ट भेज दी है | आयुक्त ने शासन को रिपोर्ट भेज दी है |
गत वर्ष मार्च माह में सदर तहसील के तत्कालीन तहसीलदार ठाकुर प्रसाद व पिलुआ सर्किल के कानूनगो सत्यवीर की बातचीत का ऑडियो वायरल हुआ था | कानूनगो ने तहसीलदार पर हर माह वीआईपी के नाम पर दस हजार रुपये मांगने का आरोप लगाया था | ऑडियो में तहसीलदार ने जिलाधिकारी के स्टेनो से मिलकर वीआईपी व्यवस्था करने को कहा था | पैसा न देने पर भू माफिया में नाम दर्ज कर राजस्व बोर्ड भेजने की धमकी दी गई थी | मीडिया में भी मामला काफी उछला था। जिसके बाद तत्कालीन डीएम अजय यादव ने स्टेनो घनश्याम को अपने कार्यालय से हटाकर प्रकरण पर जांच बैठा दी थी |
प्रकरण में कोई कार्यवाही न होने पर जैथरा के आरटीआई एक्टविस्ट सुनील कुमार ने ऑडियो को आधार बनाकर मामले की शिकायत मुख्यमंत्री से कर दी | जिसमें उन्होंने वीआईपी भ्रष्टाचार की जांच भ्रष्टाचार निवारण संगठन एजेंसी से कराने की मांग की | मुख्यमंत्री के विशेष सचिव रिगिजयान सैम्फिल ने अफसरों से जुड़े भ्रष्टाचार के मामले को गंभीरता से लेते हुए प्रकरण की जांच आयुक्त , राजस्व परिषद, लखनऊ को सौंपते हुए आख्या तलब कर ली | आयुक्त के आदेश पर जिलाधिकारी ने अपर जिलाधिकारी प्रशासन से पूरे प्रकरण की जांच कराई | एडीएम ने अपनी जांच रिपोर्ट में बताया कि तत्कालीन तहसीलदार ठाकुर प्रसाद ने कानूनगो से सरकारी कार्य हेतु कहा गया था, परन्तु प्रभारी राजस्व निरीक्षक सत्यवीर सिंह ने सरकारी कार्य से बचने के लिए षणयंत्र के तहत मिथ्या आरोप लगाए हैं | वर्तमान समय में तहसीलदार का स्थानांतरण एटा जनपद से हो चुका है | एडीएम ने जिलाधिकारी को अपनी जांच रिपोर्ट प्रेषित कर दी | जिलाधिकारी ने आयुक्त एवं सचिव, राजस्व परिषद्, उत्तर प्रदेश को जांच रिपोर्ट भेज दी है | रिपोर्ट की प्रतिलिपि प्रमुख सचिव, गृह व विशेष सचिव, मुख्यमंत्री को भेजी गई है | राजस्व परिषद के प्रभारी अधिकारी महेंद्र सिंह ने जिलाधिकारी एटा की आख्या स्वीकार कर अपनी रिपोर्ट शासन को भेज दी है |
शासन ने अलग - अलग तलब की थी आख्या
---------------------------------------------
एटा- शासन ने प्रकरण को काफी गंभीरता से लिया था | इस मामले की जांच पुलिस और प्रशासन से अलग - अलग कराकर जांच रिपोर्ट मांगी गई | शासन के आदेश पर एसएसपी ने अपर पुलिस अधीक्षक विसर्जन सिंह यादव से प्रकरण की जांच कराई | एएसपी ने प्रकरण जिलाधिकारी कार्यालय से जुड़ा होने पर अपना पल्ला झाड़ लिया और जिलाधिकारी कार्यालय से अग्रेत्तर कार्यवाही होने की आख्या लगाकर एसएसपी को रिपोर्ट प्रेषित कर दी |
बदलती रही जांच रिपोर्ट
----------------------------
एटा - इस पूरे प्रकरण में अफसरों की जांच रिपोर्ट बदलती रही | आरटीआई एक्टविस्ट सुनील कुमार की पहली शिकायत पर मामले की जांच तत्कालीन एसडीएम सदर सुनील कुमार वर्मा ने की | उन्होंने अपनी जांच में पाया कि तत्कालीन तहसीलदार ठाकुर प्रसाद व कानूनगो सत्यवीर सिंह की कोई वार्ता नहीं हुई है | शिकायत को निराधार व असत्य करार दिया गया | आरटीआई एक्टविस्ट के इस जांच रिपोर्ट पर आपत्ति लगाने के बाद मामले की पुनः जांच कराई गई | इस बार जांच तत्कालीन एसडीएम सदर रवि प्रकाश श्रीवास्तव ने की | उन्होंने अपनी जांच में पाया कि तहसीलदार ठाकुर प्रसाद की कानूनगो से वार्ता हुई थी | यह वार्ता विभागीय कार्यों के संपादन के विषय में हुई थी | रूपयों के लेन- देन के परिप्रेक्ष्य में कोई वार्ता नहीं हुई | शासन स्तर से एक बार जिला प्रशासन की आख्या ख़ारिज हो गई थी | शासन ने डीएम व एसएसपी की संयुक्त हस्ताक्षरयुक्त आख्या मांगी थी | बाद में प्रकरण की जांच राजस्व परिषद को सौंप दी गई |
जांच में नहीं सुना गया कानूनगो का पक्ष--------------------------------------------
एटा - भ्रष्टाचार के इस मामले की जांच में अधिकारी और रिपोर्टें बदलती रहीं, परन्तु किसी भी अधिकारी ने अपनी जांच के दौरान कानूनगो का पक्ष नही सुना | ऑडियो टेपिंग की भी जांच नहीं कराई गई | जांच अधिकारी आरोपी पक्ष का कथन अंकित कर एक पक्षीय जांच रिपोर्ट शासन व राजस्व परिषद को भेजते रहे हैं | जांच अधिकारियों ने तहसीलदार का खुलकर बचाव किया है |
