बाल विकास परियोजना कार्यालय भ्रष्टाचार की चपेट में, कर्मचारी नही मानते अपने अधिकारी का आदेश


अमर जीत यादव
बस्ती बनकटी: स्थानीय ब्लाक का बाल विकास परियोजना कार्यालय भ्रष्टाचार का पर्याय बन गया है।जहाँ तैनात परियोजना अधिकारी अपने उच्चधिकारी के आदेश को पिछले नौ माह से ठेंगा दिखा रहे हैं।फिर भी कार्यवाही सिफर है।
बता दें कि जिला कार्यक्रम अधिकारी ने 17 अगस्त 2016 को बाल विकास परियोजना अधिकारी बनकटी को दिये गये आदेश में लिखा है कि परियोजना के अन्तर्गत जिन मुख्य सेविकाओं ने अपने तैनाती क्षेत्र में दो वर्ष का कार्यकाल पूरा कर लिया है उनका कार्य क्षेत्र परिवर्तन कर दिया जाय। लेकिन लगभग 09 माह बीतने पर भी विभाग के उच्चाधिकारी के आदेश का पालन आज तक परियोजना अधिकारी ने नहीं किया।
इतना ही नहीं परियोजना कार्यालय के लिपिक और अनुचर समेत अधिकाँश मुख्य सेविकायें भी अपनी उँची राजनैतिक पहुँच केबलबूते नियम विरुद्ध दशकों से परियोजना में कुन्डली मारकर तैनात होकर व्यवस्था का मजाक उडा रहे हैं। जहाँ तीन वर्ष से अधिक दिनों से परियोजना अधिकारी सन्तोष कुमार त्रिपाठी स्वयं नियम विरुद्ध तैनात हैं। आरोप आम है कि परियोजना कार्यालय में लम्बे अरसे से नियम विरुद्ध तैनात कर्मचारियों ने शासन द्वारा संचालित कल्याणकारी बालपुष्टाहार हौसला पोषण गर्मा गर्म भोजन देने आदि योजना का बन्दरबाँट करने में कोई कोर कसर अब तक नहीं छोडा है।
जिसके प्रमुख गुनहगार परियोजना अधिकारी स्वंय हैं।भा.कि.यू.के मंडल महासचिव शोभाराम ठाकुर,रामफेर चौधरी,घनश्याम चौधरी,दीनदयाल चौधरी आदि लोगों ने संयुक्त रूप से बताया की परियोजना अधिकारी से लेकर मुख्य सेविकाओं द्वारा जाँच के नाम पर सिर्फ धन उगाही की जाती है। जिसके कारण विभाग की योजनायें जरुरत मन्दों तक नहीं पहुँच पा रही हैं।उन लोगों ने शासन प्रशासन का ध्यान आकृष्ट करते हुये कहा है कि बाल विकास परियोजनाओं से व्यक्ति विशेष को छोडकर आम आवाम को कोई लाभ नहीं है।
जिससे इन परियोजनाओं को बन्द किया जाना देश प्रदेश के हित में आवश्यक है। दिलचस्प मामला तो यह है सपा बसपा के शासन काल में निरंकुश और बेलगाम हो चुकी नौकरशाही अब सत्ता परिवर्तन हो जाने के बाद योगी राज में उनके बार बार आदेश निर्देश व चेतावनी के बावजूद भी सुधरने का नाम नहीं ले रही है। और नियम विरुद्ध तैनाती होने के बाद भी उसी स्थान पर कुन्डली मारकर जमें हैं 
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