लिंग-वर्द्धक यंत्र अखबार ने भी निर्भया-कांड पर मातम मनाया था और अब...?


कुमार सौवीर
लखनऊ : अक्‍सर ऐसे विषय उठ जाते हैं, जिन पर हस्‍तक्षेप करने को लेकर एक जबर्दस्‍त ऊहापोह छिड़ जाती है। दिल्‍ली के निर्भया-काण्‍ड के बाद अखबारों का व्‍यवहार ऐसे ही ऊहापोह पसरा गया। लेकिन अंतत: तय ही किया कि चाहे कुछ भी हो जाए, सच का दामन नहीं ही छोड़ा जा सकता है।
देश-विदेश को सहमा चुके दिल्‍ली का निर्भया-काण्‍ड को कई अखबारों ने अपनी साख बढ़ाने का माध्‍यम बना लिया था। इस हौलनाक हादसे को ऐसे अखबारों ने बिक्री के लिए बाकायदा बाजार में पेश कर दिया था। खबरों को कुछ इस तरह पेश किया गया मानो वे वास्‍तव में मानवता के सच्‍चे उपासक-पुजारी हैं। खुद को इस तरह सजाया-संवारा गया कि अगर उनका अखबार न होता, तो ऐसे हादसों पर जन-जागरण की मुहिम ही नहीं शुरू हो पाती।

लेकिन सच बात यही रही कि ऐसी कवायदों में जुटे अखबारों की पहचान अब तक मानवीय, पत्रकारीय और जन-सरोकारों के बजाय, पैसा उगाहने के लिए कुछ भी कर डालने वाली छवि के तौर पर रही है। ऐसे अखबार केवल और केवल विशुद्ध बनियागिरी पर आमादा हैं, जिन्‍हें आम आदमी और पत्रकारीय दायित्‍वों से कोई लेना-देना ही नहीं होता। बिड़ला समूह का अखबार हिन्‍दुस्‍तान दैनिक समाचारपत्र ऐसे अखबारों में पहली पंक्ति में सबसे आगे खड़ा दिख रहा है।
निर्भया-काण्‍ड पर सर्वोच्‍च न्‍यायालय द्वारा पांच अभियुक्‍तों को फांसी दिये जाने वाले आदेश के कवरेज में इस अखबार ने कलम ही तोड़ डाली। अखबार का पहला और दूसरा पन्‍ना को शोक-संवेदना के प्रतीक काली बाउंड्री से घेर कर तैयार किया गया। पहले पन्‍ने पर प्रमुख शीर्षक लगाया गया:- निर्भया के दोषी जीने लायक नहीं। इस में इस अखबार ने अपने पसंदीदा शख्‍स और केंद्रीय मंत्री रविशंकर प्रसाद का बयान फोटो सहित छापा। दूसरे पन्‍ने में हेडिंग लगायी कि : इस अपराध की माफी नहीं।

लेकिन हैरत की बात है कि यह हिन्‍दुस्‍तान अखबार अनाप-शनाप सेक्‍स-प्रेरित विज्ञापन का सबसे बड़ा हॉकर यानी सेल्‍समैन के तौर पर अखबारी जगत में स्‍थापित हो चुका है। किसी सस्‍ते और घटिया तथा निहायत बेशर्म विज्ञापनों की थोक मंडी बन चुका है यह अखबार। हिन्‍दुस्‍तान अखबार के सम्‍पादकीय पृष्‍ठ के पहले और उसके बाद सबसे आखिरी पन्‍ने तक निहायत बेहूदे विज्ञापनों की बहार फैलाये बैठा रहता है यह अखबार।
सर्वोच्‍च न्‍यायालय के आदेश को अगले छापने वाले दिन भी इस अखबार ने अपने 21 नम्‍बर के पन्‍ने पर कविश वटी का विज्ञापन छापा। उसकी शैली पढि़ये जरा:- हर रात सुहागरात, अपने जीवन साथी को दें कफछ खास आज की रात। प्रयोग विधि, सम्‍भोग से एक घंटा पहले दूध से लें। पूरा रात सम्‍भोग में आनन्‍द प्राप्‍त करें। शौकीन लोग  इसतेमाल करके परिणाम आज ही देखें।

और उसी दिन के अखबार में दस नम्‍बर के पन्‍ने पर तो इस हिन्‍दुस्‍तान ने कहर ही तोड़ दिया। साफ-साफ ढेरों विज्ञापन छापे, जिसमें छोटा लिंग, शीघ्रपतन आदि बेहूदा बातें दर्ज थीं। इन विज्ञापनों में दर्ज था कि ऐसे यंत्रों अथवा तेल और कैप्‍स्‍यूल के इस्‍तेमाल से कमजोर व छोटा लिंग आठ से नौ इंच तक कड़क और सुडौल बनाने के दावे किये गये थे।
दिल्‍ली के एक वरिष्‍ठ पत्रकार विनय श्रीकर के शब्‍दों में:- हिन्‍दुस्‍तान अखबार भी कोई अखबार है। दरअसल वह अखबार नहीं, बल्कि लिंग-वर्द्धक यंत्र की छवि बना चुका है।
साभार www.meribitiya.com
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