रियाजुल हक़
जौनपुर - मिसालें सुनी तो बहुत जाती हैं लेकिन उनका चरितार्थ रूप देखने को कम ही मिलता है। मंगलवार को दीवानी न्यायालय में सास व बहू का एक दूसरे के प्रति प्रेम स्नेह देखने को मिला। दोनों ने मीडिया के समक्ष शोषण करने वाली तीन तलाक व्यवस्था खत्म करने और शरीयत में औरतों को भी बराबरी का हक दिए जाने की प्रधानमंत्री से मांग किया।
पहली बार ऐसा देखने को मिला कि तीन तलाक के मुद्दे पर बेटे के खिलाफ व बहू के समर्थन में कोई सास खुलकर सामने आई हो।खेतासराय निवासी मोहम्मद फैज के तीन तलाक की इच्छा को न मानकर पत्नी आयशा व सास रुखसाना एक साथ रह रहे हैं क्योंकि सास अपनी बहू व पोतों के बगैर रह नहीं रह पा रही थी ।मुकदमे में भी सुलह हो रही है ।हुआ यूं कि मोहम्मद फैज की मुफ्ती आदि के साथ तीन तलाक के संबंध में मीटिंग की बात सास रुखसाना व अगुवा से आयशा को पता चल गई कि बाहर रह रहा पति उसे तीन तलाक देने के लिए फोन करेगा। पति ने उसे तीन तलाक देने के लिए फोन किया भी लेकिन जैसे ही उसने तलाक देने के लिए "तीन"शब्द कहा पत्नी ने फोन काट दिया और तीन तलाक की घोषणा पूरी नहीं हो पाई ।
सास रुखसाना ने कहा कि अगर आयशा तीन तलाक शब्द सुन लेती तो तीन तलाक हो जाता और हलाला के बाद ही बहू और पोते उसके पास आ पाते इसीलिए आयशा को पहले ही बता दिया गया था ।अगर ऐसा हो जाता तो आज वह अपने बहु वह पोतों के साथ से महरूम हो जाती । आयशा ने कहा कि अगर कोई रजिस्ट्री भी आएगी तो वह उसे नहीं लेगी क्योंकि पति रजिस्ट्री से भी तीन तलाक भेज सकता है। उधर रुखसाना का कहना है कि अगर किसी भी प्रकार उसका बेटा उसकी बहू को तीन तलाक देने में सफल भी हो जाता है तो भी वह अपने बहू व पोतों के साथ रहेगी और इस मुद्दे पर बेटे की खिलाफत करेगी।
खेतासराय निवासी आयशा की शादी खेतासराय के ही फैज उर्फ गुड्डू से हुई थी।आयशा के दो बच्चे हैं ।उसने दहेज उत्पीड़न का मुकदमा किया है कि 30 अक्टूबर 2013 को दहेज में मोटरसाइकिल की मांग को लेकर उसे मारपीट कर ससुराल से निकाल दिया गया। साथ ही उसने गुजारा भत्ता का भी मुकदमा किया है जिसमें कोर्ट ने फैज को आदेश दिया है कि पत्नी व बच्चों को प्रतिमाह गुजारा भत्ता अदा करें लेकिन उसने गुजारा भत्ता नहीं दिया ।
उसके खिलाफ रिकवरी वारंट जारी है ।इसी बीच तीन तलाक के संबंध में पति की मुफ्ती अधिक से मीटिंग हुई जिसके बाद उसे पत्नी को तीन तलाक बोलना था तलाक होने के बाद तलाक नामा दाखिल हो जाता और पत्नी अपने बच्चों के साथ दर दर भटकने को मजबूर हो जाती लेकिन सास रुखसाना वह अगुआ की सूझबूझ के कारण ऐसा नहीं हो पाया और फैज के मंसूबे पर पानी फिर गया। फैज के तीन तलाक देने की इच्छा को न मानकर आयशा अपने बच्चों व सास के साथ प्रेम पूर्वक रह रही है।
