नई दिल्ली. सुप्रीम कोर्ट मंगलवार को चौथे दिन भी ट्रिपल तलाक पर सुनवाई हो रही है। मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड ने अपनी दलील में कहा है कि ट्रिपल तलाक की प्रथा 1400 साल पुरानी है और हमारा इसमें भरोसा है। सोमवार को सरकार की तरफ से पैरवी करने आए अटॉर्नी जनरल मुकुल रोहतगी ने कोर्ट से कहा,"अगर सुप्रीम कोर्ट तीन तलाक को अमान्य या असंवैधानिक करार देते हुए खारिज कर देता है तो केंद्र सरकार नया कानून लाएगी। यह कानून मुस्लिमों में शादी और डिवोर्स को रेगुलेट करने के लिए होगा।" बता दें कि सुप्रीम कोर्ट में इस मसले पर रेगुलर सुनवाई हो रही है। यह सुनवाई चीफ जस्टिस जेएस खेहर की अगुआई में 5 जजों की कॉन्स्टिट्यूशनल बेंच कर रही है।
1.मुकुल रोहतगी,अटॉर्नी जनरल: तलाक के मुद्दे के अलावा निकाह हलाला और बहुविवाह(पॉलीगैमी)प्रथा पर भी सुनवाई होनी चाहिए। बहुविवाह और निकाह हलाला कोर्ट की 2 जजों की बेंच के ऑर्डर का हिस्सा थे। तलाक समेत तीनों मामलों को सुप्रीम कोर्ट की तीन जजों की बेंच को रेफर किया गया था। पाकिस्तान-अफगानिस्तान जैसे रूढ़िवादी देश रिफॉर्म के मामले में आगे बढ़ रहे हैं। हमारे जैसे सिक्युलर देश में अभी भी बहस चल रही है। अगर कोर्ट,ट्रिपल तलाक को अवैध और असंवैधानिक घोषित कर दे,तो सरकार मुस्लिमों में शादी और तलाक के लिए कानून बनाएगी।
2.सुप्रीम कोर्ट: अभी हमारे पास वक्त कम है। इसलिए ट्रिपल तलाक पर ही सुनवाई होगी। अभी हम यहां ट्रिपल तलाक के मामले में ही सुनवाई कर रहे हैं। बहुविवाह(पॉलीगैमी)और हलाला पर बाद में सुनवाई होगी।
3.सुप्रीम कोर्ट: अगर तीन तलाक जैसी प्रथा को खत्म कर दिया जाता है तो किसी भी मुस्लिम पुरुष के लिए क्या तरीके मौजूद हैं?
4.मुकुल रोहतगी: अगर सुप्रीम कोर्ट तीन तलाक को अमान्य या असंवैधानिक करार देता है तो मुस्लिमों में शादी और डिवोर्स को रेगुलेट करने के लिए केंद्र सरकार नया कानून लाएगी।
बेंच में कितने जज?
-बेंच में चीफ जस्टिस जेएस खेहर,जस्टिस कुरियन जोसेफ,जस्टिस आरएफ नरीमन,जस्टिस यूयू ललित और जस्टिस अब्दुल नजीर शामिल हैं।
-इस बेंच की खासियत यह है कि इसमें हिंदू,मुस्लिम,सिख,ईसाई और पारसी धर्म को मानने वाले जज शामिल हैं।
-इस मसले का जल्द निपटारा करने के लिए सुप्रीम कोर्ट की गर्मी की छुटि्टयों में रोज सुनवाई की शुरुआत हुई है।
-इस मसले का जल्द निपटारा करने के लिए सुप्रीम कोर्ट की गर्मी की छुटि्टयों में रोज सुनवाई की शुरुआत हुई है।
बेंच ढूंढ रही है इन 3 सवालों के जवाब
-क्या तीन तलाक और हलाला इस्लाम के जरूरी हिस्से हैं या नहीं?
-तीन तलाक मुसलमानों के लिए माने जाने लायक मौलिक अधिकार है या नहीं?
-क्या यह मुद्दा महिला का मौलिक अधिकार हैं?इस पर आदेश दे सकते हैं?
-तीन तलाक मुसलमानों के लिए माने जाने लायक मौलिक अधिकार है या नहीं?
-क्या यह मुद्दा महिला का मौलिक अधिकार हैं?इस पर आदेश दे सकते हैं?
6 दिन इस तरह चलेगी सुनवाई
-2 दिन तीन तलाक विरोधी पक्ष रखेंगे।
-2 दिन इसके समर्थकों की दलीलें होंगी।
-फिर 1-1 दिन एक-दूसरे को जवाब देंगे।
कितनी पिटीशन्स दायर हुई हैं?
-मुस्लिम महिलाओं की ओर से 7 पिटीशन्स दायर की गईं हैं। इनमें अलग से दायर की गई 5 रिट पिटीशन भी हैं। इनमें दावा किया गया है कि तीन तलाक अनकॉन्स्टिट्यूशनल है।
मुस्लिम महिलाओं को इस तरह उम्मीद
-गाजियाबाद के शब्बीर की बेटी को दहेज के लिए ससुरालवालों ने टॉर्चर किया। इसके बाद पति ने तीन बार तलाक बोलकर उससे रिश्ता तोड़ लिया। शब्बीर को लगा कि लोकल एमएलए अतुल गर्ग उसकी मदद कर सकते हैं। शब्बीर उनके पास पहुंचा तो गर्ग ने उसे दामाद के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने की सलाह दी।
-न्यूज एजेंसी के मुताबिक,गर्ग ने शब्बीर से कहा कि उनकी बेटी और उसके दो साल के बेटे को सिक्युरिटी भी मिलेगी। गर्ग मंत्री भी हैं। उनके मुताबिक,कोर्ट जाने के अलावा कोई रास्ता भी नहीं था,क्योंकि मुस्लिम पर्सनल लॉ ट्रिपल तलाक को जायज मानता है। इसलिए सरकार तब तक कुछ नहीं कर सकती,जब तक कानून नहीं बदल जाता।
-बहरहाल,शब्बीर और उनकी बेटी के अलावा देश में हजारों ऐसी मुस्लिम महिलाएं हैं,जिनकी जिंदगी तीन बार कहे गए तलाक की वजह से तबाह हो गई। अब उनकी उम्मीद गुरुवार से सुप्रीम कोर्ट में शुरू हो रही सुनवाई पर टिकी है।
-न्यूज एजेंसी के मुताबिक,गर्ग ने शब्बीर से कहा कि उनकी बेटी और उसके दो साल के बेटे को सिक्युरिटी भी मिलेगी। गर्ग मंत्री भी हैं। उनके मुताबिक,कोर्ट जाने के अलावा कोई रास्ता भी नहीं था,क्योंकि मुस्लिम पर्सनल लॉ ट्रिपल तलाक को जायज मानता है। इसलिए सरकार तब तक कुछ नहीं कर सकती,जब तक कानून नहीं बदल जाता।
-बहरहाल,शब्बीर और उनकी बेटी के अलावा देश में हजारों ऐसी मुस्लिम महिलाएं हैं,जिनकी जिंदगी तीन बार कहे गए तलाक की वजह से तबाह हो गई। अब उनकी उम्मीद गुरुवार से सुप्रीम कोर्ट में शुरू हो रही सुनवाई पर टिकी है।
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