पीस पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. अयूब ने ढाई लाख रूपये लेकर भी नही दिया था टिकट, मुकद्दमा दर्ज


पीस पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष और यौन शोषण के आरोप में घिरे डॉक्टर अयूब की मुश्किलें और बढ़ती जा रही हैं। उनके खिलाफ मुरादाबाद में एक केस दर्ज होने की खबर है। आरोप है कि डॉ. ने ढ़ाई लाख रूपए लेकर भी टिकट नहीं दिया।
हीं यौन शोषण के आरोप के मामले की जांच कर रही सीओ बीकेटी तनू उपाध्याय के हाथ कई अहम साक्ष्य लगे हैं। अनुमान लगाया जा रहा है कि जल्द डॉ. अय्यूब की अब जल्द गिरफ्तारी हो सकती है। डॉ. अय्यूब के खिलाफ साक्ष्य संकलन के दौरान सीओ बीकेटी का दावा है कि कई अहम साक्ष्य इकट्ठा कर लिए हैं।

पुलिस की कार्यशैली पर भी उठे सवाल
इस प्रकरण में पुलिस ने मामला तो दर्ज कर लिया था लेकिन डॉ. अय्यूब को अब तक गिरफ्तार नहीं किया।
पुलिस को युवती और डॉ. अय्यूब के बीच हुई बात के कॉल डिटेल भी मिले थे जिनमें यह स्पष्ट हुआ था कि डॉ अय्यूब मृतका के टच में थे। एसपी ट्रांसगोमती दुर्गेश कुमार ने डॉ. अय्यूब को मड़ियांव कोतवाली बुलाकर बयान भी दर्ज किये थे।
मृतका के भाई ने मड़ियांव कोतवाल समेत पुलिस की कार्यशैली पर आरोप भी लगाया था कि डॉ. अय्यूब को बचाया जा रहा है।
इसके बाद पीड़ित ने डीआईजी रेंज लखनऊ प्रवीण कुमार से मुलाकात कर इंसाफ की मांग की थी। इसके बाद पीड़ित परिवार को सुरक्षा भी महकमे द्वारा मुहैया कराई गई थी।
इसी प्रकरण में लापरवाही और बीते दिनों पान मसाला खाकर शपथ के मामले में तात्कालीन इंस्पेक्टर मड़ियांव नागेश मिश्र को निलंबित किया जा चुका है। पुलिस का दावा है कि जल्द अय्यूब की गिरफ्तारी हो सकती है।

यह है पूरा मामला
बता दें कि पिछले दिनों मृतका के भाई ने मड़ियांव पुलिस पर गंभीर आरोप लगाए थे। उनका कहना है कि पुलिस अयूब के रसूख के आगे नतमस्तक है।
गौरतलब है कि तहरीर में युवती के भाई के ओर से कहा गया है कि वर्ष 2012 में विधानसभा चुनाव में अपने लिए प्रचार करते हुए डॉ. अयूब खान संतकबीरनगर स्थित उसके घर आए थे।
जहां युवती से कहा था कि तुम मेरे लिए प्रचार करो, अगर जीत जाऊंगा तो पढ़ाई के साथ नौकरी भी लगवा दूंगा।
प्रचार करवाने के लिए युवती को डॉ. अयूब कुछ दिन के लिए अपने साथ ले गए। जीतने के बाद डॉ.अयूब युवती का करियर संवारने की बात कहकर लखनऊ लेकर चले गए।
उसे लखनऊ स्थित एक कॉलेज में बीएससी नर्सिग में दाखिला दिलाया। इसके बाद वह युवती का यौन शोषण करने लगे। आरोप यह भी है कि इस दौरान जब पीड़िता गर्भवती हो गई थी।
इसके बाद उसे हानिकारक दवाएं खिलाई गईं तो रक्तस्राव होने लगा। हालत गंभीर होने पर उसे ट्रॉमा में भर्ती कराया गया था। जहां इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई थी।
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