सोनू खान
आगरा। शराब के ठेको को बंद करने के लिए आगरा की जनता पूरे जोरों पर है अब देखना ये है कि प्रशाशन और सरकार इन लोगो की कितनी सुनती है और किस हद तक मदद करती है।
लोगो को शराब बंदी को लेकर जो कड़ा रुख अपना जा रहा है वो सही भी है क्योंकि शराब के कारण काफि लोगो की मौत हो रही हैं ,परिवार बिगड रहे हैं और तो और रोज रोज परिवार के गृह कलेश होने की खबरें सुनने में आ रही हैं।
इसी के चलते आगरा के जगह जगह महिलाओं और बच्चों द्वारा शराब के ठेकों के खुलने का जमकर विरोध किया जा रहा है।जिसमे एत्माद्दौला थाने के कई क्षेत्र हैं,कटरा वजीर खा वगैरह में स्वतंत्रता सेनानी चिम्मनलाल जैन जी के नेतृत्व में लोगों ने जमकर सड़क पर उतरके आंदोलन छेड़ दिए हैं।और आगरा कानपुर हाइवे को महिलाओं ने उर बच्चो ने जाम कर दिया है।
जब सरकार बूचड़खाने रातो रात बंद कर सकती है तो शराब के ठेके बंद करना कोई बड़ी बात नहीं है ।योगी जी के सत्ता में आते ही प्रशाशन सतर्क हो गए।अवैध बूचड़खाने बंद हो गए।
और भी कई ऐसे विभाग जहाँ घपलेबाजी चलती थी कुछ हाड तक सुधर गए हैं अब कितने दिन के लिए इसपे कुछ नहीं कहा जा सकता।
सरकार द्वारा जब स्कूल कॉलेज के नजदीक मौजूद दुकानों पे से गुटके,सिगरेट बंद कर दिए गए हैं।जिससे स्वास्थ को नुक्सान होता था।
लेकिन जिस शराब स्व स्वास्थ के साथ साथ मानसिकता खराब होती है,रोज नए नए गृह कलेश पनपते हैं और तो और लोगो की जान भी जाती हैं तो क्या ये गली मोहल्लों में मौजूद शराब के ठेके बंद नहीं हो सकते?
बिल्कुल हो सकते है लेकिन बशर्ते मौजूदा सम्बंधित विभाग के लोग केवल निज स्वार्थ छोडकर काम करें।
उल्टा होता ये है कि आये दिन शराब के नए नए ठेके खोलने की अनुमति मिल जाती है।अब ये ठेके किस जगह खुल रहे हैं।किस माहौल में खुल रहे हैं किसी को कोई फर्क नहीं पड़ता।
वहां स्कूल के बच्चों का आना जाना है इस बात से भी सम्बन्धित विभाग का कोई ध्यान नहीं है उन्हें बस जेब गर्म कर अनुमति दे दी जाती है।
और दामों में तो ऐसे कमी की जाती है जैसे कि अगर ये महंगी कर दी गयी तो लोगो पर मंहगाई की मार पड़ जायेगी और शराबियो को कम कीमत में शराब पीने के लिए उत्तेजित किया जाता है।
अरे अगर ये सस्ती किसी रोज मर्रा की घर परिवार में उपयोग में आने वाली चीजों में की जाए तो कितनो का भला होगा।।।लेकिन सम्बंधित विभाग का शराब सस्ती करना परमधर्म हो गया है।
