
नई दिल्ली: नवरात्र के दौरान व्रत रखना हर किसी को पसंद होता है. पर कुछ लोग इन नौ दिनों तक व्रत के दौरान अपनी सेहत को नजरअंदाज कर देते हैं. लेकिन, जो लोग हृदय रोग, डायबिटीज़ और उच्च रक्तचाप जैसी समस्या से पीड़ित हैं, उन्हें और गर्भवती महिलाओं को इस दौरान अपनी खास देखभाल करनी चाहिए. व्रत रखना अच्छी बात है लेकिन अपनी सेहत को दरकिनार करना सही नहीं है. ऐसे मरीजों में दिन में केवल एक बार भोजन करना समस्याएं पैदा कर सकता है. ऐसे में व्रत के दौरान भी से फिट रहा जाए, आइए जानते हैं.
इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (आईएमए) मनोनीत अध्यक्ष डॉ. के. के. अग्रवाल ने बताया कि “अगर पोषण की उचित गुणवत्ता शरीर को मिलती रहे, तो व्रत रखने से शरीर पर बेहद सकारात्मक प्रभाव पड़ता है. जिन मरीजों को दिल की समस्या है, उन्हें आलू के पकौड़े और आलू के प्रोसैस्ड चिप्स जैसी तली हुई चीजें नहीं खानी चाहिए. मधुमेह के मरीजों को उसी वक्त अपना व्रत खोल देना चाहिए जब उनकी शुगर का स्तर 60 एमजी से नीचे चला जाए. उन्हें दिन में काफी मात्रा में तरल आहार भी लेते रहना चाहिए, क्योंकि शरीर में डिहाइड्रेशन होने से लकवा या दिल का दौरा पड़ सकता है”.
डॉक्टर का कहना है कि टाइप-2 डायबिटीज़ से पीड़ित मरीजों में व्रत रखने से खतरा कम होता है, लेकिन टाइप-1 डायबिटीज़ के मरीजों को व्रत बिल्कुल नहीं रखना चाहिए. लंबी बीमारियों से पीड़ित मरीजों को व्रत रखते समय डॉक्टर से सलाह लेना चाहिए, क्योंकि नियमित तौर पर चल रही दवाओं की खुराक व्रत की वजह से 40 से 50 प्रतिशत तक कम करने की ज़रूरत हो सकती है.
कुछ सेहतमंद सुझाव
सादा दही की बजाए लौकी का रायता खाएं. बीच में स्नैक्स के तौर पर बादाम खाते रहे. कुट्टू के आटे की रोटी कद्दू की सब्जी के साथ खाएं. थोड़ी-थोड़ी देर बाद उचित मात्रा में फल खाते रहें, ताकि शरीर को भरपूर मात्रा में पोषक तत्व मिलते रहे. सिंघाड़े और कुट्टू का आटा मिलाकर खाने में शामिल करें. सिंघाड़ा अनाज नहीं बल्कि फल है, इसलिए इसे अनाज की जगह प्रयोग किया जा सकता है. सिंघाड़े के आटे में ग्लूटन नहीं होता, इसलिए सीलियक बीमारी से पीड़ित या ग्लूटन से एलर्जी वाले मरीज इसका प्रयोग कर सकते हैं.
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