चाय से शुरू हुई गाय पर अटकी राजनीति आय पर होगी ख़त्म


पीएम नरेंद्र मोदी की नोटबंदी राजनीति का मसौदा साबित हो रही है। नोटबंदी मौत का शतक लगा चुकी है। नोटबंदी के 40 दिन बाद भी जन जीवन सामान्य नही हो सका है। आम जनता को बैंक की लाइन में लगने के बाद भी घर खर्ज के लिए 2000 रूपये नही मिल पा रहे हैं। कारोबारियों, भाजपा नेताओं और अधिकारियों के कब्जे से करोड़ों रूपये के नए नोट बरामद हो रहे हैं। आम आदमी से उसके खाते में जमा की गई उसकी जमा पूंजी का आयकर विभाग हिसाब मांग रहा है। पीएम मोदी ने राजनीतिक दलों को खातों में पुराने नोट जमा करने और उसका ब्यौरा न देने की छूट देकर चोर-चोर मौसेरे भाई की कहावत को सच साबित कर दिया, लेकिन जनता है कि नोटबंदी की तमाम परेशानियां झेलने के बाबजूद पीएम मोदी के फैसले को सही बता रही है। नोट की चोट का दर्द कोई उस माँ से पूंछे जिसका एकलौता बेटा नोटबंदी की भेंट चढ़ गया। उस विधवा से नोटबंदी की तकलीफ को साँझा किया जाये। जिसका नोटबंदी से मांग का सिंदूर उजड़ गया। पीड़ा उन अनाथ बच्चों से पूंछी जाये जिनके सिर से पिता का साया उठ गया? नोटबंदी के फैसले से वही लोग खुश हैं। जो अपने दुःख से ज्यादा दूसरों से सुख से परेशान रहते हैं। जो लोग नोटबंदी के फैसले का समर्थन कर रहे हैं। उन्हें नोटबंदी से तकलीफ तो बबासीर जैसी है, लेकिन किसी को बताकर अपनी तकलीफ जग जाहिर नही करना चाहते हैं। इसलिए वो यही कहते नजर आते हैं। थोड़ी तकलीफ तो है, लेकिन मोदी जी का फैसला अच्छा है। भारतीय संविधान के अनुसार नियम कानून हर भारतीय नागरिक के लिए एक समान हैं। फिर चाहें वो राजनेता हो, अफसर हो, डॉक्टर हो, वकील हो, पत्रकार हो, इंजीनियर हो, व्यापारी हो या फिर वह आम आदमी हो? जब सबके लिए कानून एक जैसा है तो फिर नोटबंदी के इस नियम कानून में भेदभाव क्यों? बैंक की लाइन में पैसे जमा करते और निकलते हुए कोई नेता, व्यापारी, अफसर नजर क्यों नही आया। नियम कानून के चाबुक से आम आदमी की चमड़ी क्यों उधेड़ी जा रही है। राजनीतिक दलों पर पीएम मोदी ने कार्रवाई का कोई चाबुक नही चलाया, बल्कि उन्हें कालेधन को सफ़ेद करने का सुनहरा मौका दे दिया। देश में सबसे ज्यादा काला धन राजनेताओं के पास है। मैं ये बात दावे के साथ कह रहा हूँ, क्योंकि अगर कोई 10 किमी के रोड का टेंडर 10 करोड़ रूपये में उठता है तो उसमें 15 से 20 प्रतिशत की कमीशन सम्बंधित जन प्रतिनिधि को जाती है। सरकार में बैठे जन प्रतिनिधि (मंत्री) तो अरबों खरबों रूपयों की योजनाओं को लागू करते हैं। आप अंदाजा भी नही लगा सकते आपके विधायक, सांसद और मंत्री पांच सालों में इतना पैसा कमा लेते हैं। राजनीतिक दलों के खातों में जमा पैसों पर पीएम मोदी कोई सवाल जवाब नही किया। आम आदमी से एक एक पैसे का हिसाब माँगा जा रहा है। पीएम मोदी को जनता के दर्द का कोई मलाल नही है। बस आय आय का हल्ला कर रहे हैं। अब मैं असल मुद्दे पर आता हूँ। वर्ष 2014 के लोकसभा चुनाव में चाय चाय चिल्लाकर देश की सत्ता पर काबिज हुई मोदी सरकार बिहार विधानसभा चुनाव में गाय पर अटक गई। मोदी भक्तों ने गाय गाय का इतना शोर मचाया कि बीजेपी बिहार चुनाव हार गई। अब मोदी भक्त आय आय चिल्ला रहे हैं। गाय गाय चिल्लाने से सिर्फ एक समुदाय को निशाना बनाया गया था। अब भक्त आय आय चिल्लाकर हर धर्म और सातों जाति को निशाना बनाये हुए हैं। आय आय से देश के हर नागरिक को तकलीफ है और यूपी-पंजाब में विधानसभा चुनाव नजदीक हैं। जनता अपनी तकलीफ का भाजपा से बदला ले सकती है। आय आय का नारा बुलंद करने वाले भक्त भाजपा के लिए ताबूत की आखिरी कील साबित होंगे। (लेखक अमन पठान केयर ऑफ़ मीडिया न्यूज़ नेटवर्क के संपादक हैं)

Post a Comment

Previous Post Next Post