सुधीर कुमार नई दिल्ली। उम्र के जिस पड़ाव में अधिकतर लोग दूसरों के मोहताज हो जाते हैं उस पड़ाव में ओमकार नाथ शर्मा (80) लोगों को मुफ्त जीवनदायिनी दवा बांट रहे हैं। पैरों से 40 फीसद दिव्यांग हैं, फिर भी रोजाना बसों में कई किलोमीटर का सफर करते हैं और पांच किलोमीटर पैदल चलकर दवा मांगते हैं, ताकि दवा की कमी में कोई दम न तोड़े। जागरण की रिपोर्ट के अनुसार पहले उन्हें सवाल-जवाब के साथ कमेंट भी सहने पड़ते थे। अब देश-विदेश से लोग उनक पास दवा के पार्सल भेजते हैं। आज उन्हें मेडिसिन बाबा के नाम से जाना जाने लगा है। वह बताते हैं कि 2008 में लक्ष्मी नगर में मेट्रो हादसे के बाद कई लोगों को दवा की कमी में तड़पते देखा। उस घटना ने अंदर तक झकझोर दिया। दवा इकट्ठी करने का सिलसिला आज तक बदस्तूर जारी है। शुरू में जो दवा मिलती उसे राम मनोहर लोहिया व अन्य अस्पतालों मों गरीबों को बांट आते थे। एक साल ही हुआ कि एक दिन एक व्यक्ति ने टोक दिया कि आप न फार्मासिस्ट हो और न ही डॉक्टर, फिर ऐसे दवा कैसे बांट सकते हो। उसके बाद दवाइयां चैरिटेबल ट्रस्ट और अस्पतालों में देनी शुरू कर दी। लोगों ने आर्थिक मदद भी की तो दवाएं भी बढ़ीं। किराये का एक बड़ा घर लेकर एक हिस्से में आशियाना और दूसरे हिस्से में दवाखाना बनाकर एक फार्मासिस्ट रख लिया। जरूरतमंदों को इस दवाखाने से दवाएं तो मिलती ही हैं, साथ ही अगर कोई चिकित्सक या अस्पताल गरीबों के लिए दवा या जीवन रक्षक उपकरण मांगते हैं तो उन्हें उपलब्ध कराया जाता है। पहले दवाओं का टोटा होता था, अब लाखों रुपये की दवाएं उलब्ध हैं। बहुत से लोग खुद दवा पहुंचाने आते हैं। देश-विदेश से लोग दवाइयों के पार्सल भी भेजते हैं, लेकिन मेडिसन बाबा अभी भी लोगों को जागरूक करने के लिए दवा मांगते हैं कि घर में बची हुई दवा फेंकें नहीं इसे किसी जरूरतमंद तक पहुंचाया जाए। वह रोजाना सुबह 10 बजे घर से निकलते हैं। वे वही दवाएं लेते हैं जिनकी एक्सपायरी डेट कई महीने बची हो। शुरुआत में उनके परिवार ने भी उनका विरोध किया, लेकिन गरीबों की मुस्कराहट को देख अब परिवार भी सहयोग कर रहा है।उनका बेटा इस कार्य से जुड़ गया है।
खरीदकर भी देते हैं दवाएं किसी गरीब मरीज की किडनी फेल है या कैंसर पीड़ित है तो बाबा अपने पास से दवाएं खरीदकर भी देते हैं। हर महीने 40 हजार से ज्यादा की दवा खरीदते हैं। बाबा कहते हैं कि दवाइयों की कीमत बाजार में बहुत ज्यादा है। कई परिवार दवा खरीदने में ही तबाह हो जाते हैं। ऐसे में जेनेरिक दवाओं के प्रचलन को बढ़ाना जरूरी है। मेडिसिन बाबा को दर्जनों पुरस्कार व उपहार भी मिल चुके हैं। - बजाज कंपनी ने मोटर साइकिल उपहार में दी। -कोलकाता की कंपनी आइसीएमआर ने नैनो कार दी। -हांगकांग के एक व्यक्ति ने दिव्यांगों वाली स्कूटी गिफ्ट की। हर कोई कर सकता सहयोग मेडिसिन बाबा के पास दवा पहुंचाने और लेने के लिए मेडिसिन बाबा का पता है: ए-39, हस्तसाल विहार, दाल मिल रोड, नजदीक वेस्ट उत्तम नगर, मेट्रो स्टेशन, नई दिल्ली-110059 फोन नंबर- 09250243298