कानपुर। रेल मंत्री सुरेश प्रभु ने कहा है कि पुखरायां रेल हादसे की उच्च स्तरीय जांच होगी। उन्होंने घटनास्थल का दौरा किया और अस्पतालों में घायलों से भी मिले। प्रभु ने कहा कि अभी पीड़ितों को मदद पहुंचाना हमारी प्राथमिकता है। एनडीआरएफ की टीम और ऐक्शन रिलीफ बैन मौके पर पहुंच चुकी है। उन्होंने कहा कि अभी पीड़ितों की मदद करना सबसे जरूरी है और इसमें सभी को सहयोग करना होगा। इससे पहले रेल राज्यमंत्री मनोज सिन्हा ने भी घटनास्थल का दौरा कर राहत और बचाव के काम का जायजा लिया। उन्होंने कहा कि प्रशासन पूरी संवेदनशीलता के साथ राहत और बचाव के काम में लगा है।
गौरतलब है कि कानपुर के नजदीक पुखरायां में इंदौर-पटना एक्सप्रेस की 14 बोगियां पटरी से उतर गई। इस दर्दनाक हादसे में 100 से ज्यादा लोगों की मौत हो गई जबकि करीब 200 घायल हैं। एनडीआरएफ की टीम राहत और बचाव के काम में जुटी है। रेस्क्यू ऑपरेशन में गैस कटर का कम से कम इस्तेमाल किया जा रहा है क्योंकि ये बहुत ज्यादा गर्मी पैदा करता है और गैस छोड़ता है जिससे घुटन हो सकती है। बचाव के काम में जुटे कानपुर स्माल आर्म्स फैक्ट्री के एक अधिकारी पंचरतन सिंह ने बताया, 'हमें निर्देश दिया गया है कि गैस कटर्स का कम से कम इस्तेमाल किया जाए क्योंकि इससे धातु पिघलती है और गर्म गैस पैदा होती है जिससे घुटन होती है।' उनकी अगुवाई में आर्म्स फैक्ट्री के 8 से 10 वेल्डर ट्रेन में फंसे हुए लोगों को निकालने में जुटे हैं।
सिंह ने बताया कि नैशनल डिसास्टर रेस्पॉन्स फोर्स (NDRF) बोगियों के स्टील फ्रेम को काटने के लिए कोल्ड कटर्स का इस्तेमाल कर रही है ताकि बोगियों के भीतर का तापमान न बढ़े। उन्होंने बताया, 'बोगियों को जेसीबी मशीन की मदद से हटाया जा रहा है। हम बोगियों के भीतर कई जिंदा लोगों को देख चुके हैं। डिब्बे बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो चुके हैं लेकिन कुछ बचावकर्मियों ने उनके भीतर फंसे पीड़ितों की कराह को सुना है।'
हादसे में जिंदा बचे आदिल अहमद ने बताया कि हादसे के वक्त तड़के 3 बजे के करीब ट्रेन तेज रफ्तार से चल रही थी, जिस वजह से 4 बोगियां एक के ऊपर एक करके चढ़ गईं। उनके मुताबिक बचावकर्मी हादसे के आधे घंटे बाद मौके पर पहुंचें क्योंकि ग्रामीण इलाके की सड़कें खराब थी।
