कुमार सौवीर
लखनऊ : भाजपा में प्रदेश महामंत्री दयाशंकर सिंह तो खैर मूर्ख था ही। इसीलिए बसपा सुप्रीमो मायावती की तुलना किसी घुटी हुई बाजारू वेश्या से कर बैठा। बोला कि पैसों का लेनदेन तो मायावती किसी घटिया वेश्या की तरह करती है। इसीलिए इस मूर्खतापूर्ण बयान देने वाले दयाशंकर सिंह को बसपा ने लपक लिया। मच गया हंगामा। हालत यह हुई कि दयाशंकर सिंह को भाजपा ने दूध की मक्खी की तरह पार्टी से निकाल बाहर कर दिया।
लेकिन नसीमुद्दीन सिद्दीकी दयाशंकर सिंह की मूर्खता को भुनाने के लिए जो हरकत की, वह कम से कम किसी शैतानी दिमाग से कम नहीं थी। बसपा में अपनी पैठ को और मजबूत करने और मायावती की नजरों में खुद को बहादुर शेर साबित करने के लिए नसीमुद्दीन सिद्दीकी ने लखनऊ के हजरतगंज चौराहे पर डॉ भीमराव आम्बेदकर की प्रतिमा पर बसपाइयों का भारी जमावड़ा जुटाया था। करीब पांच घंटों तक यह भीड़ भाजपा और दयाशंकर सिंह पर ही हमले नहीं करती रही, बल्कि इस हमले में केंद्र में इन बसपाइयों ने दयाशंकर सिंह के 13 साल की मासूम बच्ची तक को नहीं बख्शा।
सरेआम मां-बहन की नंगी-अश्लील गालियां बकती हुई यह भीड़ अपनी हुंकारों में दयाशंकर की मां, बहन और पत्नी तथा बेटी तक को सरे-चौराहे पर नंगा करने वाली गालियां देती रही। भीड़ ने यहां तक ललकार लगायी कि दयाशंकर सिंह की बेटी समेत उसके परिवार की सारी औरतों को यहीं चौराहे पर लाकर इस भीड़ के सामने पेश किया जाए। और उसके बाद यह भीड़, इन लोगों से खुद ही निपट लेगी। कहने की जरूरत नहीं कि इस भीड़ के इस चिल्ल-पों का आशय इन महिलाओं को सरेआम नंगा कर उनके साथ सब के सामने बलात्कार करने का था।
बसपा
कहने की जरूरत नहीं कि इस पूरे दौरान नसीमुद्दीन सिद्दीकी ही नेतृत्वकर्ता थे, प्रमुख वक्ता थे और पूरा आयोजन सिद्दीकी ने ही किया था। वे ही लाउडस्पीकर पर दयाशंकर सिंह के परिवार की महिलाओं को सरेआम नंगा करने की ललकारें फेंक रहे थे। चिल्ला रहे थे सिद्दीकी कि बहन जी की इज्जत का बदला लेने के लिए सारे बसपाई तैयार हैं, अब भाजपा और सरकार ही दयाशंकर सिंह की बेटी और बहन को यही चौराहे पर पेश करे। कहने की जरूरत नहीं कि सिद्दीकी की भाषावली ऐसी थी कि सुन रहे लोगों के कानों में मानो पिघला सीसा डाला जा रहा हो। तब पूर्व एमएलसी और बाराबंकी में भाजपा के वरिष्ठ नेता हरगोविंद सिंह ने कटाक्ष किया था कि:- लड़कियों को पेश करने-कराने का धंधा तो मुगलों का खानदानी रहा है। हिन्दुओं में तो जौहर की परम्परा रही है।
बहरहाल, परसों जब मायावती ने नसीमुद्दीन सिद्दीकी को बसपा से बर्खास्त किया तो सिद्दीकी को अपनी बेटी याद आ गयी। वे बोले:- मायावती की सेवा के लिए मैंने अपनी बेटी तक का मुंह नहीं देखा। वह मौत की आगोश में थी, पत्नी बार-बार मुझे बेटी का आखिरी दर्शन कराने की गुजारिश कर रही थी, लेकिन मैं मायावती के आदेश पर अपनी उस मर रही बच्ची का चेहरा तक नहीं देखने जा पाया।
है न नसीमुद्दीन सिद्दीकी का यह हैरतनाक और शर्मनाक बयान। हाल ही बसपा से निकाले गये एक वरिष्ठ नेता का कहना है कि सिद्दीकी को किसी भी मौत पर कोई भी रंज नहीं होता। भले वह स्वाति सिंह की बेटी हो या फिर अपनी खुद की बच्ची। जो अपनी बच्ची का नहीं हुआ, वह स्वाति सिंह की बेटी का क्या होता।
साभार मेरी बिटिया डॉट कॉम
