तुफैल इदरीसी
अमेठी। चारगाह जमीन पर किये गये कब्जाधारी पर मेहरबान प्रशासन उच्च न्यायलय लखनऊ खंड पीठ व राजस्व विभाग नोटिस, उत्तर प्रदेश शासन प्रमुख सचिव व मुख्य सचिव के आदेशित मीटिग की अनदेखी, राज्यपाल द्वारा सवेत्र पत्र, नियम,क़ानून और नोटिस,की धज्जिया उड़ा कर रख दी गई है अमेठी जनता की समस्या का समाधान हो , सभी प्रशासनिक अधिकरियो के मोबाइल पर सुनाई देता और प्रशासनिक प्रचारों में दिखाई देता है I
इसकी विपरीत प्रशासन की अनदेखी से रसूख व प्रभावशाली लोगो ने चारागाह की जमीन पर कब्ज़ा कर लिया है I गरीब और अल्पसंख्यक के लिए आवंटित चारागाह को भी नहीं बक्सा जा रहा है , प्रशासन की मिली भगत से चारागाह पर अवैध रूप से पट्टा कर दिया गया है , भूमि अधिनियम के तहत सार्वजानिक भूमि का पट्टा नहीं हो सकता Iयह सावर्जनिक सरकारी संपत्ति है गरीब सिर्फ मायूसी के बीच में इन्साफ की आशा में अधिकारियो के चक्कर लगा रहे है इन्साफ से आज तक वंचित है I
ऐसा लगता है की गाय हमारी माता है किताबो के पन्नो में खो जाता है I गाय के मुद्दे पर सब राजनितिक पार्टिया रोटी सेक रही है I लेकिन ग्रंथो में माँ का दर्जा प्राप्त बेजुबान मवेशी खाने के स्त्रोत पर पिछले तीन साल से गाज गिर चुकी है I पर किसी भी राजनितिक दल ने आगे आकर मदद करने की कोशिश नहीं की
प्रशासन का कहना है जब तक पैरवी नहीं करोगे, पट्टा कैसे निरस्त होगा,अमेठी प्रशासन द्वारा गांव वालो को गुमराह किया गया है गांव- डेहरा, थाना- संग्रामपुर, जिला- अमेठी, में ग्राम सभा से मिलने वाली सुवधा अमेठी प्रशासन और कब्जाधारी द्वारा शोषण किया जा रहा है,चारागाह की जमीन का विवाद लगभग 3 साल से है,अधिकरियों की मिली भगत से फर्जी पट्टा कर दिया गया है , जाँच में यह भी पाया गया कि नियम के विरुद्ध पट्टा किया गया है यानी फर्जी पट्टा है, प्रश्न चिन्ह पट्टे कैसे खाली होते है राजस्व विभाग, उच्च न्यायालय और प्रमुख सचिव जी द्वारा बताया है
अमेठी प्रशासन द्वारा मुकदमे में जान बूझकर ढकेला गया है,बिल्कुल अंधी कानून व्यवस्था, इसका मतलब है सांप भी मर जाये, लाठी भी न टूटे, नोटिस अनुसार ये ज़मीन मौक़े पर खाली कर के , अमेठी प्रशासन बनाम कब्जधारी को मुकदमा लड़ना चाहिए, यहॉ तो गांव वालो पर ही मुकदमा करवा दिया ।
क्या है मामला
ग्रामीणो की दर्जनों शिकायत बाद भी प्रशासन खाली कराने में अस्मर्थ रहा है,तहसील सूत्र के अनुसार डेहरा ग्राम ,तहसील-अमेठी में 948/0.066 चारागाह की भूमि चिन्हित है रसूखदारो और अधिकारियो की मिली भगत से तथ्यों को छुपा कर मेड बाँध दिया गया है भूमि अधिनियम के मुताबिक चारागाह की भूमिं पर किसी भी प्रकार का निर्मार्ण कार्य,सार्वजानिक सम्पत्ति का पट्टा व अन्य काम नहीं किया जा सकता I
मुख्यमंत्री के माध्यम से ई-शिकयत पत्र, ऑनलाइन द्वारा प्रषित है
मामले को तूल पकड़ते देखा मुख्यमंत्री ऑफिस से शिकायत की गयी, लेकिन प्रशासन ने मुख्यमंत्री के माध्यम से भी गोल मोल जवाब प्राप्त हुआ उसमे ये नहीं दिखाया किस प्रकार की भूमि चारागाह ,कब्रिस्तान,शमशानघाट और तालाब चिन्हित नहीं दिखाया, गांव वालो द्वारा प्राथमिकी दर्ज कराने की मांग की गयी,प्रमुख सचिव के आदेशित के बाद भी क़ानूनी कार्यवाही नहीं की गई, यह 05704806 आज तक लंबित है, यहाँ दाल पूरी काली है।
रिपोर्टो और आदेशित मीटिग की अनदेखी, नियम, क़ानून और नोटिस,की धज्जिया उड़ा कर रख दी
मामले की जांच करने पर पता चला पट्टा हो चूका था , लेखपाल की और से सम्बंधित विभाग को रिपोर्ट सौपी थी ,उच्च न्यायलय लखनऊ खंड पीठ 15 मई 2013 और राजस्व विभाग 6 दिसम्बर 2013 को नोटिस देकर मौके पर खाली और दोषी कब्जाधारी के खिलाफ उचित कार्यवाही करने का भी आदेश दिया है और उपजिलाधिकारी ने आदेश दिया था। पुलिस बल के साथ मौके जाकर खाली कराया जाए, लेकिन प्रशासन और थाना प्रभारी के द्वारा उचित कार्यवाही नही की गयी।
अपरजिलाधिकारी ने भी लिखित आदेश दिया था की उपजिलाधिकारी को खाली करने से पहले और खाली होने के बाद वीडियोग्राफी के साथ दस्तावेज उच्च न्यायायलय में भेजे जाए I उपजिलाधिकारी के अनुसार जमीन का पट्टा हुआ था साथ में ये भी माना नियम के विरुद्ध, ये रिपोर्ट एक बार नहीं तीन बार लेखपाल द्वारा सम्बंधित अधिकारियों को सोंपी गयी है प्रश्न चिन्ह लगा दिया गया है उपजिलाधिकारी द्वारा।
प्रश्न चिन्ह लगी जमीन इस प्रकार खाली होती है।
राजस्व विभाग द्वारा प्रमुख सचिव उत्तर प्रदेश ,किशन अटोरिया ने अपने पेज नंबर 4 प्रपत्र क्रमश 20 में स्पस्ट किया है की पेज नंबर 5 पैराग्राफ नंबर 7 में क,ख,ग,घ, से ज्ञान हुआ है की ग्राम समाज की सरकारी सम्पत्ति है।
एक न्यूज़ में सन्दर्भ से जांच चल रही है मगर आज तक जाँच नही हुई , न क़ानूनी कारवाही हुई दबंगों के खिलाफ।दूसरी न्यूज़ के सन्दर्भ से प्रशासन बोल रहा है जानवर चारा खाने में स्वन्त्र है बिल्कुल झुंठ बोल रहे है नारा नहीं, गाय को चारा चाहिये।
