केजरीवाल जैसों की नियति है नष्ट हो जाना. एक अच्छे खासे आंदोलन की माकानाकासाका करने के बाद यह आदमी अब खुद और अपनी पार्टी की वाट लगाने लगा है. भाजपा को क्यों कोस रहे हैं साहिब. सियासत में पार्टियां ऐसे ही दूसरे दलों पर निशाना साधा करती हैं.
सवाल ये है कि आज आपके बचाव में कोई खड़ा क्यों नजर नहीं आ रहा. हम जैसे प्रचंड समर्थक तो सरकार बनने के कुछ माह बाद ही बदले रंग ढंग देखकर अलग हो लिए थे. कुछ दिन बाद आम आदमी पार्टी में संजय सिंह, मनीष सिसोदिया और केजरीवाल ही रह जाएंगे. आशुतोष तो डूबता जहाज देख कितना भी गहरा पानी क्यों न हो, कूद जाएगा और हल्ला मचा कर किनारे पहुंच जाएगा.
किसी चैनल का सलाहकार बन जाएगा. लेकिन उन लाखों करोड़ों कार्यकर्ताओं का क्या, जिन्होंने तन मन धन से साथ दिया और एक सपने को जिया. अब भी वक्त है आम आदमी पार्टी के इमानदार समर्थकों, इस कुंठित प्राणी केजरी से नाता तोड़ लो और अपना जीवन जियो. केजरी जैसे मनोरोगी न मिलेगा. ये भी अंत में, पांच साल का कार्यकाल पूरा करने के बाद फिर से अपने एनजीओ को चलाएगा और हमेशा की तरह सिसोदिया इसके अधीन होकर एनजीओ में विदेशी फंडिंग के लिए जोरशोर से लग जाएगा.
यशवंत सिंह की फेसबुक वॉल से
(यशवंत सिंह भड़ास 4 मीडिया के संपादक हैं)
