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8 लोगों का एनकाउंटर प्रथमदृष्टया फर्जी है, पढ़िए युवा पत्रकार कृष्णकांत और वसीम अकरम त्यागी के भोपाल एनकाउंटर की हकीकत दिखाते यह फेसबुक पोस्ट।

8 लोगों का एनकाउंटर प्रथमदृष्टया फर्जी है.

जब कैदी जेल में थे, निहत्थे थे, सुरक्षा के अंदर थे, तब वे आराम से जेल में सेंध लगाते हैं और एकमात्र पुलिसकर्मी की हत्या करके भागने में सफल हो जाते हैं. भागने से नहीं रोक पाए, लेकिन एनकाउंटर तुरंत कर दिया, सफलतापूर्वक. गजब है!
ये वे कैदी हैं जो 2013 में खंडवा जेल से भी फरार हुए थे. दोबारा उन्हीं लोगों की सुरक्षा में सिर्फ एक गार्ड रखा गया था?
मजा देखिए, कैदियों ने सेंध लगाई और सिर्फ सिमी के तथाकथित आतंकी भागे जो कि मुसलमान थे. बाकी सब कैदी वहां पर कल्पवास करने गए हैं. 8 लोग भाग रहे थे, सुरक्षाकर्मी मारा जा चुका था, लेकिन अन्य कैदियों का हृदयपरिवर्तन हो गया होगा. इसलिए उन्होंने जेल में ही रहने का फैसला किया.
राज्य सरकार के मंत्री कह रहे हैं कि सिमी के आरोपियों के पास गन नहीं थी. आइजी साब कह रहे हैं कि आरोपियों ने पुलिस पर फायरिंग की और जवाबी कार्रवाई यानी एनकाउंटर में मारे गए.
जिस तरह अंडरट्रायल कैदी को पागल हो चुका भारतीय मीडिया आतंकवादी लिखता है, उसी तरह पागल हो चुकी सरकारें एनकाउंटर करवाती हैं.
15-20 साल जेल में सड़कर फिर कोर्ट से निर्दोष साबित हुए युवकों की कहानियां आपने नहीं सुनी हैं? सैकड़ों का जीवन बर्बाद किया जा चुका है.
हालांकि, यह जांच का विषय है कि एनकाउंटर फर्जी है या सही. लेकिन यदि नौ लोगों का एनकाउंटर हो सकता है तो कल को आपका भी हो सकता है. हर फर्जी एनकाउंटर भारतीय संविधान और कानून का भी एनकाउंटर है.
-कृष्णकांत


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जो लोग एनकाउंटर में मारे गए, वे शायद आतंकवाद की कई घटनाओं के आरोपी थे.
पुलिस अपने बयान में उन्हें आरोपी कह रही है. मुख्यमंत्री शिवराज चौहान आतंकवादी कह रहे हैं.
समाचार एजेंसी ANI उन्हें सिमी आतंकवादी लिख रही है. PTI सिमी एक्टीविस्ट लिख रही है.
बीबीसी इन्हें सिमी कार्यकर्ता और कैदी लिख रहा है.
पंजाब केसरी लिखता है 'सिमी के आठ खुंखार आतंकवादी'. भास्कर पर भी यही कॉपी है. दोनों में 'खुंखार' शब्द लिखा है. एक मूर्ख ने पहले कॉपी तैयार की है. दूसरे ने चांप दिया है. दोनों खबर का एंगल एक है.
दैनिक जागरण, आजतक, जनसत्ता और ​हिंदुस्तान आदि के लिए वे लोग आतंकवादी थे.
नवभारत टाइम्स एक खबर में संदिग्ध आतंकवादी लिख रहा है. दूसरे में आतंकवादी लिख रहा है. लेकिन इसी खबर में कार्यकर्ता भी लिख रहा है. नवभारत टाइम्स यह भी लिख रहा है कि आतंकियों पर 5-5 लाख का इनाम घोषित किया गया है. पता नहीं जिंदा थे तब किया गया था या मुर्दों पर इनाम रखा गया है.
एनडीटीवी इन्हें कैदी, सिमी के सदस्य, सिर्मी कार्यकर्ता और आतंकी सब ​लिख रहा है.
किसी आतंकवादी से किसी को कैसी सहानुभूति? वह बम दगाएगा तो हम आप में से कोई भी मर सकता है. लेकिन जब सैकड़ों युवकों को कोर्ट ने सालों बाद निर्दोष छोड़ा हो, उनके खिलाफ बिना सबूत के उनके जीवन बर्बाद किए गए हों, तब मीडिया विचाराधीन कैदियों को इतने आत्मविश्वास से आतंकवादी कैसे कह रहा है?
तो सार यह है कि बिना कानून और अदालत से दोष सिद्ध हुए भी मीडिया आपको किसी काल्पनिक या संदेहास्पद अपराध का अपराधी घोषित कर सकता है.
-कृष्णकांत के फेसबुक वॉल से

क्या राम राज्य में ऐसे ही मिलता है मृत्युदंड?

''एक आंकड़ा और भी है वह यह कि जितने भी सिमी के 'आतंकी' गिरफ्तार करके जेलो में डाले गये हैं वे सबके सब उच्च शिक्षा ग्रहण कर रहे थे, मसलन कोई मैडिकल, कोई बीटेक, कोई प्रशासनिक सेवा का छात्र थे। और दूसरा बड़ा पहलू यह कि सिमी के किसी भी 'आतंकी' पर अभी तक अपराध साबित नहीं हो पाया हां दस साल, पंद्रह साल, और हद की 23 साल जेल में गुजारने के बाद भी सिमी के 'आतंकी' अदालत से बाइज्जत बरी हुऐ हैं''

''जेएनयू का एक छात्र पिछले 15 दिन से गायब है राम राज्य के अंडर में आने वाली पुलिस उसे ढ़ूंढ़ने में अभी तक नाकाम है, मगर दूसरे राम राज्य मध्यप्रदेश में रात को ‘फरार’ हुऐ सिमी के कार्यकर्ताओं को न सिर्फ पकड़ा गया बल्कि जज बनकर खुद ही मृत्यूदंड दे दिया गया। यदि आप पीड़ित हैं तब आपकी कोई नहीं सुनेगा और यदि आप पर जेबकतरने का भी महज आरोप लग गया तब सिस्टम के साथ – साथ खापिया सिस्टम भी आपको अदालत से पहले ही सजा देने मे पहली पंक्ति में आकर खड़ा हो जायेगा''

''व्यापम में 42 मौतें हुईं थीं लाशों का अर्धशतक पूरा करने के लिये शिवराज को आठ लाशों की ओर दरकार थी और आज शिवराज एक विशेष तबके का अभिवादन स्वीकार रहे हैं, यह वह तबका है जिसके लिये महंगाई, बेरोजगारी, भुखमरी, गरीबी, अशिक्षा, एक तरफ उनका अपना ऐजेंडा एक तरफ। शिवराज मामा आपने अधिकारिक तौर पर एक साल में लाशों का अर्धशतक जड़ दिया, मगर इसके लिये मैं आपको मुबारकबाद भी नहीं दे सकता। आज की आठ लाशों को भी व्यापम में एड कर लिया जाये''
वसीम अकरम त्यागी के फेसबुक वॉल से -

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